जानिए चक्कर आने के क्या है लक्षण, कारण, निदान व घरेलू उपचार ?

आज के समय की बात करें तो भाग-दौड़ भरी जिंदगी में खान-पान का अच्छे से ध्यान न रखना कही न कही चक्कर आने की गंभीर समस्या में शामिल है। वही चक्कर आने के दौरान व्यक्ति बेहोश, कमजोर या अस्थिर महसूस कर सकता है। इसके अलावा ये समस्या क्यों उत्पन्न होती है इसके कारण क्या है, और इसके लक्षणों को जानकर हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है इसके बारे में आज के आर्टिकल में बात करेंगे ;

चक्कर आने के कारण क्या है ?

चक्कर आने के कई कारण हो सकते है, जैसे-

  • वर्टिगो, बता दे की इस स्थिति में आस-पास की जगह या चीजें घूमती हुई मेहसूस होती है।
  • माइग्रेन से पीड़ित लोगों को चक्कर आने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। 
  • रक्तचाप में तेज या तेजी से गिरावट के कारण चक्कर का आना काफी गंभीर समस्या हो सकती है।
  • हृदय रोग भी चक्कर की समस्या को उत्पन्न कर सकता है। 
  • एनीमिया से पीड़ित लोगों को चक्कर आने का अनुभव हो सकता है। 

उपरोक्त चक्कर आने के कारण ज्यादा गंभीर है या नहीं के बारे में विस्तार से जानने के लिए बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना से संपर्क करें।

क्या है चक्कर का आना ?

  • चक्कर का आना एक ऐसा स्थिति है जो सुस्त, अस्थिर, लाइट-हेडेड या कमजोर होने की भावना से जुड़ा है। 
  • आमतौर पर असंतुलन यानी की डिस-इक्विलिब्रियम और वर्टिगो, चक्कर आने का मुख्य कारण होते है।
  • वही जब हमारे द्वारा अच्छी डाइट को नहीं लिया जाता है तब भी ये समस्या उत्पन्न होती है।

लक्षण क्या है चक्कर आने के ?

  • असामान्य रूप से हिलने-डुलने की अनुभूति जैसे कि एक तरफ से दूसरी तरफ हिलने का एहसास होना।
  • एक ऐसा एहसास जहां व्यक्ति को महसूस होता है कि वह घूम रहा है या उसके आस-पास की दुनिया घूम रही है।
  • असंतुलन या संतुलन खोने की भावना। 
  • उल्टी या मतली की अनुभूति आदि।

चक्कर से बचाव का घरेलू उपचार क्या है ?

  • अपना संतुलन खोने की संभावना से आपको अवगत रहना है, जिससे गिरने और गंभीर चोटें लग सकती है।
  • अतिरिक्त स्थिरता के लिए अचानक हिलने-डुलने से बचें।
  • अपने टब और शॉवर के फर्श पर फिसलन रहित चटाई का प्रयोग करें।
  • चक्कर आने पर तुरंत बैठ जाएं या लेट जाएं। 
  • यदि आप बिना किसी चेतावनी के बार-बार चक्कर आने का अनुभव करते है, तो कार चलाने या भारी मशीनरी चलाने से बचें।
  • कैफीन, शराब, नमक और तंबाकू के सेवन से बचें। इन पदार्थों का अत्यधिक उपयोग आपके संकेतों और लक्षणों को और गंभीर बना सकता है।
  • पर्याप्त तरल पदार्थ पिएं।
  • यदि आपको किसी दवा के कारण चक्कर आते है, तो खुराक को रोकने या कम करने के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।
  • यदि चक्कर आने के साथ मतली आती है, तो मेक्लिज़िन या डाइमेनहाइड्रिनेट जैसे ओवर-द-काउंटर एंटीहिस्टामाइन लेने का प्रयास करें। 
  • यदि आप अधिक गर्मी या निर्जलीकरण के कारण चक्कर महसूस कर रहे है, तो किसी ठंडी जगह पर आराम करें और पानी या स्पोर्ट्स ड्रिंक पियें।

सुझाव :

यदि आप लगातार चक्कर आने की समस्या से परेशान है, तो इससे बचाव के लिए आप झावर हॉस्पिटल के अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट से सम्पर्क करें। 

निष्कर्ष :

चक्कर का आना वैसे ज्यादा गंभीर समस्या नहीं है,अगर समय पर इसके उपचार के बारे में सोच ले तो। वही यदि आप इस समस्या से निजात पाना चाहते है तो इससे बचाव के लिए आपको उपरोक्त बातों का ध्यान रखना चाहिए और साथ ही अपने खान-पान में पौष्टिक आहार को शामिल करें।

क्या वाकई चुपचाप पड़ सकता है दिमाग के अंदर मिर्गी का दौरा? डॉक्टर से जानें इसके लक्षणों के बारे में!
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जानिए मिर्गी के दौरे को नज़रअंदाज़ करना कैसे हो सकता है खतरनाक ?

मिर्गी एक जानलेवा बीमारी है, क्युकि इसका दौरा पड़ने पर व्यक्ति को खुद की सुध नहीं रहती। वही एक ताजा रिसर्च में यह बात सामने आई है कि मिर्गी के पीड़ितों में मृत्यु का खतरा अन्य लोगों के मुकाबले बहुत अधिक होता है। इसके अलावा इस दौरे के पड़ने पर हमे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इसके बारे में आज के लेख में चर्चा करेंगे ;

मिर्गी का दौरा आने पर क्या करें?

  • मिर्गी की बीमारी गंभीर समस्या है, अगर इसका सही समय पर इलाज न हो तो मरीज के दिमाग पर काफी बुरा असर पड़ता है। वही मिर्गी के लिए कई तरह की थेरेपी और इलाज मौजूद है। 
  • लेकिन ये दौरा अगर घर में अचानक से किसी को पड़ जाए तो ऐसे में आप मरीज को अंगूर का जूस पिला सकते है, इससे थोड़ी राहत मिल सकती है। 
  • इसके अलावा करौंदा खाने से भी मिर्गी का दौरा कम हो सकता है। 
  • साथ ही कद्दू का सेवन करने से भी मिर्गी के दौरे की संभावना को कम किया जा सकता है।  
  • तुलसी के रस से भी मिर्गी के दौरे को कम किया जा सकता है। 
  • दौरे के बाद मरीज़ के आस-पास खुली जगह छोड़े। 
  • दौरे के दौरान मरीज़ को खाने को कुछ न दे।

यदि हॉस्पिटल आपके घर के नजदीक में है और आपके मिर्गी के दौरे का खतरा काफी बढ़ चूका है तो इसके लिए आपको बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना से सलाह लेना चाहिए।

क्या है मिर्गी का दौरा ?

  • मिर्गी एक पुरानी बीमारी है, जिसकी पहचान बार-बार होने वाले अकारण दौरे हैं।
  • वही मिर्गी एक क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जिसमें मस्तिष्क असामान्य रूप से कार्य करता है और बार-बार दौरे का कारण बनता है। तो दौरे मस्तिष्क की समस्याओं के लक्षण हैं जो अचानक हो सकते हैं और मस्तिष्क में असामान्य विद्युत गतिविधि, बेहोशी, और लंबे समय तक शरीर का अनियंत्रित रूप से हिलना इसमें शामिल हो सकता है। 
  • इसके अलावा ये दौरा सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकता है, चाहे उनका लिंग, नस्ल आदि कुछ भी हो। ज्यादातर मामलों में, इसे दवा से ठीक किया जा सकता है। हालांकि, मिर्गी वाले लोगों के दौरे को नियंत्रित करने के लिए कुछ मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

मिर्गी का दौरा पड़ने पर डॉक्टर को कब बुलाना चाहिए ?

  • जब मरीज़ का दौरा पांच मिनट से अधिक समय तक का हो।
  • दौरा रुकने के बाद सांस लेने या होश में आने में अधिक समय लगता हो।
  • पहले दौरे के तुरंत बाद दूसरा दौरा पड़ता हो।
  • आप गर्मी, थकावट, या तेज बुखार का अनुभव कर रहे हो।
  • यदि आप गर्भवती है।
  • आपको मधुमेह की समस्या है।
  • दौरे के दौरान जब आप खुद को चोट पहुँचाते है।
  • दौरा पड़ने से पहले आपके शरीर के एक तरफ अचानक सिरदर्द, सुन्नता या कमजोरी का अनुभव होना स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
  • यदि उपरोक्त तरह की स्थिति आपके दौरे के दौरान उत्पन्न हो जाए तो आपको बिना देरी किए डॉक्टर का चयन कर लेना चाहिए।

सुझाव :

  • अगर आपको भी मिर्गी के दौरे ने काफी परेशान कर रखा है, तो इसके लिए आपको झावर न्यूरो हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

मिर्गी का दौरा काफी खतरनाक माना जाता है ये तो आपने जान ही लिया है, इसलिए आप या आपके परिवार जनों में से कोई इस तरह की समस्या का सामना कर रहा है तो इसके लिए आपको समय पर किसी बेहतरीन डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

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न्युरोलजी: जानें हाथ कांपने की समस्या किस बीमारी की और इशारा करती है !

कुछ लोगों को सामान पकड़ते समय, या कुछ लिखते समय या अन्य काम करते समय हाथ कांपने की दिक्कत होती है।

तो वही कुछ लोगों को पता ही नहीं चलता की ये समस्या क्यों होती है। इसके अलावा आज के लेख में हम बात करेंगे की हाथ कांपने की समस्या क्यों होती है, और हाथ का कांपना किस बीमारी की और इशारा करता है इसलिए इसके बारे में जानने के लिए आर्टिकल के साथ अंत तक बने रहें ; 

क्यों होती है हाथ कांपने की परेशानी ?

  • अगर किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह की दिक्कत हो तो वो ब्रेन की ऐक्टिविटीज से जुड़ी होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब शरीर की कुछ खास कोशिकाएं किसी भी चोट या बीमारी के कारण दब जाती हैं, तब व्यक्ति में इन दिक्कतों की शुरुआत होती है।
  • वही हाथ कांपने की दूसरी समस्या तब उत्पन होती है जब आप चिंतित या क्रोधित हो जाते हैं। 
  • वही अगर आप भी इस समस्या का सामना कर रहें है तो इससे निजात पाने के लिए आपको बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करना चाहिए।

किस बीमारी की वजह से हाथ कांपने की समस्या उत्पन होती है ?

  • ये एक विल्सन डिजीज है। ये बीमारी व्यक्ति को अचानक से नहीं होती है। यह एक दिमाग का रोग है। 
  • वही चोट के अलावा इस बीमारी के कारण वंशानुगत भी हो सकते हैं। जैसे अगर माता-पिता में ये बीमारी होगी तो बच्चों में इस समस्या के उत्पन होने की ज्यादा संभावना होती है।

किन कार्यो को करते वक़्त हाथ कांपने की होती है समस्या ?

  • जिन लोगों को हाथ कांपने की दिक्कत होती है वे कैंची का उपयोग करने, सुईं में धागा डालने, सब्जी काटने, लिखने, देर तक टाइपिंग करने जैसे कुछ कामों को करने में दिक्कत का अनुभव कर सकते हैं, और ऐसे लोगों को हाथों और ब्रेन के बीच अधिक सामंजस्य बनाए रखने की जरूरत होती है।

बिना वजह हाथ कांपने की समस्या क्यों उत्पन होती है ?

  • कुछ अनुभवी डॉक्टरों का कहना है कि बिना वजह हाथ का कांपना तंत्रिका तंत्र में समस्या है और यह समस्या व्यक्ति को बहुत ज्यादा तनाव में भी डाल सकती है। 

हाथ कांपने की समस्या को कैसे सुधारा जा सकता है ?

  • लाइफस्टाइल को व्यवस्थित कर या हाथों से जुड़े व्यायाम करके इस स्थिति को सुधारा जा सकता है। रक्त प्रवाह बाधित न हो, इसका आपको खास ख्याल रखना है।
  • इसके अलावा हाथ सामान्य कार्य करते वक़्त भी कांप रहें है तो इसको नज़रअंदाज़ न करें बल्कि समय रहते डॉक्टर का चयन करें। वही किसी व्यक्ति में यह दिक्कत गंभीर रूप ले चुकी है तो दवाइयों और सर्जरी के जरिए इसका इलाज करें।
  • इसके अलावा इस समस्या के निदान के लिए आप फिजिशियन, न्यूरॉलजिस्ट, सायकाइट्रिस्ट से मिल सकते हैं। जिससे वो आपकी स्थिति के हिसाब से आपकी बीमारी से जुड़ी सलाह और दवाई आपको देंगे।

सुझाव :

अगर हाथ कांपने की समस्या आपके अंदर बीमारी का रूप धारण कर चुकी है तो इससे बचाव के लिए आपको झावर ब्रेन एन्ड स्पाइन हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

हाथ कांपने की समस्या सामान्य सी भी होने पर फ़ौरन डॉक्टर का चयन करें क्युकि इस समस्या का समय रहते इलाज करवा कर हम इस बीमारी का खात्मा जड़ से कर सकते है पर अगर ये समस्या ज्यादा बढ़ गई तो ये अपने साथ कई अन्य बीमारियों को जन्म दे सकती है। इसलिए इसके शुरुआती दौर में ही आप सतर्क हो जाए।

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तंत्रिका में दर्द का क्या है उपचार, प्रक्रिया, लागत और साइड इफेक्ट्स ?

तंत्रिका तंत्र व्यक्ति के शरीर में बहुत ही मत्वपूर्ण स्थान रखता है क्युकि शरीर का छोटे से लेकर बड़ा कार्य इसके द्वारा ही किया जाता है। शरीर को एक जगह से दूसरी जगह पर सन्देश को भेजना भी इसके द्वारा ही संभव हो पाता है। 

तो वही तंत्रिका के बिना हमारा शरीर कार्य करने में असमर्थ हो जाता है इसके अलावा अगर इसमें किसी भी तरह की परेशानी आ जाए तो कैसे हम खुद का इससे बचाव कर सकते है और तंत्रिका में दर्द की समस्या उत्पन हो जाए तो इसके उपचार, लागत और गलत प्रभाव क्या होंगे, इसके बारे में भी बात करेंगे। इसलिए इसको जानने के लिए आर्टिकल को अंत तक जरूर से पढ़े ; 

तंत्रिका में दर्द की समस्या क्यों उत्पन होती है ?

  • तंत्रिका में दर्द आमतौर पर एक चोट या बीमारी के कारण होता है जो आपके केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी) या आपकी मांसपेशियों और अंगों तक जाने वाली नसों को प्रभावित करता है। वही तंत्रिका में दर्द के सामान्य कारणों में शामिल हैं आपके मस्तिष्क, रीढ़ या नसों में चोट। 
  • दूसरी और नसों का दर्द, जिसे नसों का दर्द या न्यूरोपैथिक दर्द भी कहा जाता है, तब होता है जब कोई स्वास्थ्य स्थिति उन नसों को प्रभावित करती है जो आपके मस्तिष्क में संवेदनाएं ले जाती हैं।
  • तंत्रिका दर्द आपके शरीर में किसी भी तंत्रिका को प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह आमतौर पर कुछ नसों को दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित करता है।

तंत्रिका दर्द का इलाज कैसे किया जाता है?‎

  • तंत्रिका दर्द का इलाज करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन ऐसी कई रणनीतियाँ हैं जिन्हें आप आज़मा सकते हैं, इसके इलाज में। तो वही अंतर्निहित कारण का इलाज करना, इसका पहला कदम है।
  • आपका डॉक्टर मधुमेह और विटामिन बी 12 की कमी जैसी किसी अंतर्निहित स्थिति का इलाज या प्रबंधन भी कर सकता है।
  • वही इसके इलाज के लिए कभी-कभी क्रीम, जैल, लोशन और पैच जैसे ‎सामयिक उपचार तंत्रिका दर्द से निपटने में मदद करते हैं। एक डॉक्टर ‎एंटीकोनवल्सेंट्स को एंटी-ड्रिंपेंट्स के साथ ‎तंत्रिका दर्द से पीड़ित रोगी को सलाह दे सकता है। 

क्या तंत्रिका में दर्द का कोई नुकसान भी है ?

  • इसके नुकसान में धुंधली दृष्टि, पसीना, शुष्क मुंह, बेचैनी, चक्कर ‎आना और रेसिंग दिल की धड़कन शामिल हैं। तो वही तंत्रिका दर्द ‎का इलाज करने के लिए प्रयुक्त एंटीकोनवल्सेंट दर्द और ‎चक्कर आना, सूजन पैदा करना जैसे नुकसान शामिल हैं। 

अगर तंत्रिका में दर्द के साइड इफेक्ट्स आपमें नज़र आने लगे तो इससे बचाव के लिए आपको बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करना चाहिए।

तंत्रिका में दर्द के इलाज का खर्चा कितना आता है ? 

  • तंत्रिका में दर्द से पीड़ित व्यक्ति का इलाज अगर दवाओं के ‎साथ किया जाए, तो इसकी कीमत 5000 रुपये से लेकर 20000 रुपये हो सकती है। ‎हालांकि, सर्जिकल और संबंधित प्रक्रियाओं के लिए, ‎एक व्यक्ति को अस्पताल और शहर के आधार पर 6-15 लाख का भुगतान करना पड़ ‎सकता है।

अगर आप भी तंत्रिका में दर्द की समस्या से परेशान है और इसका इलाज किफायती दाम में करवाना चाहते है तो इसके के लिए झावर न्यूरो ब्रेन एन्ड स्पाइन हॉस्पिटल का चुनाव जरूर से करें।

निष्कर्ष :

तंत्रिका में दर्द की समस्या से निजात पाने के लिए किसी अच्छे डॉक्टर का चयन जरूर से करें और इसके इलाज के लिए किसी भी तरह की दवाई को खुद से न ले बिना डॉक्टर के सलाह के।

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क्या करवट बदलने से लकवे का मरीज़ 6 महीने में ठीक हो सकता है ?

दिमाग में खून का थक्का जमने के कारण लकवा मारने की शिकायत होती है, तो वही कुछ लोगों का मानना है कि लकवा मारने की वजह से शरीर में कोई भी सेन्सेशन नहीं होती और ऐसी अवस्था में पेशेंट अपना कोई भी काम करने में असमर्थ होता है। इसके विपरीत कुछ अनुभवी डॉक्टरों का मानना है की लकवा आने के दो या तीन दिन में ही मरीज़ में फर्क पड़ना शुरू हो जाता है और आने वाले कुछ महीनो में इनमे फर्क पड़ जाता है। इसके अलावा करवट का लकवे से क्या तालुक है हम इसके बारे में भी बात करेंगे, इसलिए आर्टिकल को अंत तक जरूर से पढ़े ;

लकवा शरीर में क्यों मारता है ?

  • लकवा मारने के आम तौर पर 2 कारण सबसे गंभीर माने जाते हैं, जिसमें एक ब्रेन हैम्ब्रेज है यानी दिमाग में जाने वाली ब्लड का पाइप फट जाना। और दूसरा कारण है कि दिमाग में खून की सप्लाई करने वाले पाइप में किसी न किसी तरह की ब्लॉकेज का आ जाना। 
  • वैसे ज्यादातर मामलों में लकवा पाइप ब्लॉक होने की वजह से होता है।

लकवे की समस्या क्यों उत्पन होती है इसके बारे में जानने के लिए आप बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करें। 

लकवे की समस्या कब व्यक्ति में उत्पन होती है ?

लकवा एक ऐसी बीमारी है जो अचानक से होती है। लकवा तब होता है जब अचानक मस्तिष्क के किसी हिस्से मे ब्लड का सर्कुलेशन रूक जाता है या फिर ब्रेन की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। रक्त वाहिका फट जाने से मस्तिष्क की कोशिकाओं के आस-पास की जगह में खून भर जाता है। जिससे लकवे की समस्या उत्पन होती है।

लकवे की समस्या उत्पन होने पर कैसे लाए उसमे सुधार ?

  • पेशेंट को न्यूट्रल पोजिशन में रखे। उसे हर घंटे में करवट दिलवाएं। 
  • न्यूट्रीशियन से लकवे के मरीज़ के लिए डाइट चार्ट बनवाएं। लो कैलोरी, लो फैट और विटामिंस युक्त डाइट दें। बी-कॉम्पलेक्स देना जरुरी है। यह नर्व के लिए बेहतरीन विटामिन है।  
  • जैसे-जैसे दिमाग में थक्के का जोर कम होता है। दिमाग में बची हुई कोशिकाएं रिकवर होना शुरू हो जाती हैं। रिकवरी के हिसाब से एक्सरसाइज करवाएं। 
  • पैरों पर उसे धीरे-धीरे खड़ा करवाएं। हाथों से फंक्शनल काम होते हैं। एक्सरसाइज के लिए मशीनें उपलब्ध हैं। वहीं, होममेड तरीके भी हैं। पेशेंट खुद भी एक्सरसाइज कर सकता है। वहीं, अस्सिटेंट भी करवा सकते हैं। 
  • हाथों में रिकवरी आने पर ब्रश पकड़ना सिखाएं। हाथों को फंक्शनल बनाने के लिए बड़े से छोटे टास्क करवाए। यदि हाथों में रिकवरी आना शुरू हो चुका है। वह बारीक काम नहीं कर पा रहा है। उसे ब्रश पकड़ना सिखाएं। 
  • पेशेंट जैसे-जैसे रिकवर करता है। उसे सेल्फ डिपेंडेंट बनाएं, रिकवरी स्टेज में ऐसा करवाने से फायदा मिलेगा।  

लकवे की समस्या से निजात दिलवाने के लिए कौन-से बाहरी उपकरण सहायक है ?

  • रेजिडुअल पैरालिसिस स्टेज ये तकनीक आधुनिक है, इसका प्रयोग आज के समय में किया जाता है। इसके अलावा इसमें न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर भी शामिल है।
  • मिरर थैरेपी भी काफी मददगार है लकवे से मरीज़ को निजात दिलवाने के लिए।

यदि आप या आपके आस-पास कोई हो जो लकवे की समस्या से जूझ रहा है तो इसके लिए आप झावर हॉस्पिटल का चयन करें।

सुझाव :

लकवे की समस्या उत्पन होने पर आपको किन बातो का ध्यान रखना चाहिए इसके बारे में तो हम आपको उपरोक्त बता ही चुके है। लेकिन कोई भी तरीका अपनाने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से जरूर सलाह ले। 

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हाथों की कंपन की न्यूरोलॉजिकल बीमारी के बारे में जानें

हाथों की कंपन एक न्यूरोलॉजिकल समस्या हो सकती है जो अनेक लोगों को प्रभावित करती है। यह सामान्यतया हाथों के बेचैनी और त्रांगुट से जुड़ी होती है। यदि आप इस समस्या से पीड़ित हैं, तो आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट ज्ञानेन्द्र झावर (Jhawar Neuro) आपकी सहायता कर सकते हैं। इस लेख में, हम आपको हाथों की कंपन की न्यूरोलॉजिकल बीमारी के बारे में विस्तार से बताएंगे और यहां ज्ञानेन्द्र झावर के द्वारा उपलब्ध उपचार के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे। चलिए, हम इस विषय की खोज करें और हाथों की कंपन की न्यूरोलॉजिकल बीमारी की दुनिया को समझें।


  1. हाथों की कंपन के कारण और प्रकार

हाथों की कंपन के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से अधिकांश मामलों में यह एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी के लक्षण होते हैं। इसमें उम्र, उपयोग की गई दवाओं, स्ट्रेस, बीमारी या घाव के कारण भी शामिल हो सकते हैं। इस खंड में, हम इन कारणों की विस्तार से चर्चा करेंगे और आपको अलग-अलग प्रकार की कंपन के बारे में जानकारी देंगे।


  1. लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट और उपचार

लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट ढूंढना महत्वपूर्ण होता है जब आपको हाथों की कंपन की समस्या होती है। डॉ. ज्ञानेन्द्र झावर (Jhawar Neuro) लुधियाना के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट में से एक हैं जो हाथों की कंपन और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के लिए प्रमाणित हैं। इस खंड में, हम आपको उनके बारे में अधिक जानकारी और लुधियाना में न्यूरोसर्जन के रूप में उपलब्ध उपचार की जानकारी प्रदान करेंगे।


  1. बच्चों के लिए न्यूरोलॉजी में महत्वपूर्ण भूमिका

बच्चों के न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना उचित देखा जाता है। इसके लिए, बेस्ट पेडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट का सहारा लिया जा सकता है। हम इस खंड में बच्चों के लिए न्यूरोलॉजी में महत्वपूर्ण भूमिका और लुधियाना में उपलब्ध बेस्ट पेडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट के बारे में चर्चा करेंगे।


  1. हाथों की कंपन का इलाज और उपचार

हाथों की कंपन का उपचार न्यूरोलॉजिकल समस्या के प्रकार और उसके कारण पर निर्भर करेगा। इस खंड में, हम आपको हाथों की कंपन के उपचार के विभिन्न आयुर्वेदिक, औषधीय और साइकोथेरेपी विकल्पों के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे।


  1. न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का बचाव और सावधानियां

न्यूरोलॉजिकल समस्याओं को पहचानना और उन्हें बचाव करना महत्वपूर्ण है। हम इस खंड में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के बचाव के लिए महत्वपूर्ण सावधानियों के बारे में चर्चा करेंगे और आपको इन समस्याओं को संभालने के लिए उपयोगी सुझाव प्रदान करेंगे।

समापन

 विभिन्न उपचार विकल्पों की मदद से आप हाथों की कंपन को कम कर सकते हैं और इस समस्या से राहत पा सकते हैं। बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना डॉ. ज्ञानेन्द्र झावर (Jhawar Neuro) आपकी सहायता कर सकते हैं और इस समस्या को समझने, उपचार करने और संभालने में आपको मदद कर सकते हैं। आपके हाथों को स्वस्थ रखना महत्वपूर्ण है, इसलिए अपनी स्वास्थ्य को संभालने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह लेना एक अच्छा कदम हो सकता है।

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आखिर कितने तरह का होता है पार्किंसंस रोग? डॉक्टर से जानें इनके अलग-अलग प्रभावों के बारे में!
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आखिर कितने तरह का होता है पार्किंसंस रोग? डॉक्टर से जानें इनके अलग-अलग प्रभावों के बारे में!

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अपनी मस्तिष्क स्वास्थ्य की देखभाल के लिए चुनें बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना

मस्तिष्क एक शक्तिशाली और आश्चर्यजनक अंग है जो हमारे समय, विचारों और कार्यों को निर्देशित करता है। अपने मस्तिष्क की देखभाल करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमारे स्वास्थ्य और विकास के लिए आवश्यक है। यदि आप लुधियाना में रहते हैं और मस्तिष्क स्वास्थ्य की देखभाल की आवश्यकता है, तो आपको बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करना चाहिए। इस ब्लॉग में, हम इस विशेषज्ञता और उनके महत्वपूर्ण टेस्ट के बारे में विस्तार से बात करेंगे।

बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट: अपने मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए मार्गदर्शक

जब आप मस्तिष्क स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करते हैं, बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट आपके लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं। वे एक परशिक्षित चिकित्सक होते हैं जो मस्तिष्क, स्पाइनल कॉर्ड और पेरिफेरल नर्वस सिस्टम से संबंधित समस्याओं के निदान, उपचार और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखते हैं। वे ब्रेन, स्पाइन, न्यूरोमस्क्यूलर विज्ञान, न्यूरोफिजियोलॉजी और न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त करते हैं। न्यूरोलॉजिस्ट्स काफी समय तक शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं ताकि वे मस्तिष्क संबंधी विभिन्न समस्याओं का समाधान कर सकें।

लुधियाना में बहुत सारे न्यूरोलॉजिस्ट उपलब्ध हैं और आपको बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण तत्वों को ध्यान में रखना चाहिए। यहां कुछ सुझाव हैं जो आपको सहायता प्रदान कर सकते हैं:

  1. पेशेंट रिव्यूज़: अगर आप न्यूरोलॉजिस्ट के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं, तो आप पहले से ही मौजूदा पेशेंटों की समीक्षा पढ़ सकते हैं। यह आपको उनकी दक्षता, अनुभव और प्रदान की गई सेवाओं की गुणवत्ता का अंदाज़ा देगी।
  2. अनुभव: एक अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करने के लिए उनके अनुभव को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आप न्यूरोलॉजिस्ट के अनुभव के बारे में विवरण प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि उनकी कार्य अनुभव, संबंधित विशेषज्ञता, और उनके द्वारा किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के उपचार तकनीक।
  3. व्यावसायिक संगठनों की पहचान: न्यूरोलॉजिस्ट के व्यावसायिक संगठनों की पहचान करना भी महत्वपूर्ण होता है। कुछ महत्वपूर्ण संगठन, जैसे कि न्यूरोलॉजी सोसाइटी, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, या इंडियन न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी जैसे संगठनों की मान्यता होती है। इसके अलावा, ध्यान देने योग्य है कि वे उच्च न्यूरोलॉजी संस्थानों से संबंधित हैं या नहीं।
  4. संदर्भ और समीक्षा: आपको न्यूरोलॉजिस्ट के संदर्भ और समीक्षा की जांच करनी चाहिए। आप उनके पूर्व पेशेंट्स से संपर्क करके उनके अनुभव के बारे में प्राप्त कर सकते हैं और उनसे न्यूरोलॉजिस्ट की दक्षता, उपचार प्रणाली, और रोगी सहायता के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  5. सुविधाएं और अस्पताल के मानक: जब आप न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करते हैं, तो उनके कार्यालय और अस्पताल की सुविधाओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करेगा कि उनकी व्यावसायिकता, तकनीकी सुविधाएं, और उपचार प्रणाली समर्पित हैं और आपके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए उच्च मानकों का पालन किया जाता है।

याद रखें, मस्तिष्क स्वास्थ्य की देखभाल का चयन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपको एक ऐसे न्यूरोलॉजिस्ट की तलाश होनी चाहिए जिसमें आप विश्वास रखते हैं और जिसका अनुभव, दक्षता, और पेशेंट सहायता पर आप पूर्ण विश्वास रख सकते हैं।

अपनी मस्तिष्क स्वास्थ्य की देखभाल के लिए चुनें बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट, जैसे  डॉ सुखदीप सिंह झावर अस्पताल परिणामदायी और पेशेवर सेवाओं के लिए।सबसे महत्वपूर्ण है कि आप अपनी समस्याओं को समय रहते निदान और उपचार कराएं ताकि आप अपने जीवन को स्वस्थ और सकारात्मक ढंग से जी सकें।

क्या वाकई चुपचाप पड़ सकता है दिमाग के अंदर मिर्गी का दौरा? डॉक्टर से जानें इसके लक्षणों के बारे में!
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  • May 6, 2026

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दौरे पड़ने पर क्या करे या किन बातों का रखें ध्यान ?

यदि आपको भी दौरे पड़ते है या इस समस्या से आप भी जूझ रहे है तो इससे बचाव के लिए आपको खुद से ही जागरूक होने की जरूरत है। इसके इलावा यदि आपके सामने किसी को दौरे पड़ रहे है तो उसके दौरे के समय को जरूर नोट करे। और उसको इस समस्या से कैसे निजात दिलवाए इस बारे में हम इस लेख में बात करेंगे ;

दौरे पड़ने की समस्या क्यों उत्पन होती है ?

ये समस्या क्यों उत्पन होती है हम इसके बारे में बात करेंगे ;

  • दौरे का पड़ना एक आम बात है। ये स्ट्रोक, सिर की चोट, मेनिनजाइटिस या किसी अन्य बीमारी के कारण भी पड़ सकता है। 
  • जब दिमाग में किसी तरह का इलेक्ट्रिकल डिस्टर्बेंस पैदा होने लगता है तो ये दौरे पड़ते हैं। फिट्स या सीजर्स के दौरान व्यक्ति के व्यवहार, सोचने और समझने की क्षमता प्रभावित होती है। अगर आपको 2 बार से अधिक सीजर्स या दौरे आ चुके हैं तो उसे एपिलेप्सी यानि मिर्गी भी कह सकते हैं। 

दौरे पड़ने पर किन बातों का रखे ध्यान ?

यदि आपके किसी अजीज या करीबी को दौरे पड़ रहे है तो आपको निम्न बातो का ध्यान रखना है ;

  • सबसे पहले तो इस बात का ध्यान रखें कि अगर वह खतरे वाली जगह पर हैं तो उन्‍हें वहां से हटाएँ – जैसे गर्म बर्तन के पास या व्‍यस्‍त सड़क पर। 
  • जमीन पर हैं तो उनके सिर के नीचे तकिया जरूर लगाएं। 
  • गले के आसपास कसे हुए कपड़े को ढीला करें। 
  • उनके ऐंठन खत्‍म होने के बाद उन्‍हें दूसरी करवट लिटाएं। 
  • उनके साथ रहें और पूरी तरह सामान्‍य होने तक आराम से बात करें। 
  • दौरे शुरू होने और खत्‍म होने का समय जरूर दर्ज करें। 
  • प्रभावित व्‍यक्‍ति अगर व्‍हीलचेयर पर है, तो उसके ब्रेक्‍स लगाने के साथ ही सीट बेल्‍ट या सुरक्षात्‍मक उपकरण चालू कर दें। उन्‍हें धीरे से सहारा दें और सिर के नीचे तकिया लगा दें। 
  • उनके मुंह में अपनी उंगली समेत कुछ भी न डालें, पूरी तरह ठीक होने से पहले उन्‍हें कुछ खाने को न दें।
  • इसके इलावा दौरे पड़ने के स्थिति की एक डायरी भी व्यक्ति को जरूर लिखनी चाहिए और उसे अगर बहार कही जा रहे है तो अपने पास ही रखे।

दौरे पड़ने पर और किन बातो का ध्यान रखना चाहिए, इसके बारे में जानने के लिए आप बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना से जरूर से संपर्क करें।

क्या दौरे पड़ने पर एंबुलेंस को बुलाया जा सकता है ?

दौरे पड़ने के दौरान हमे एंबुलेंस की जरूरत कब होती है, के बारे में बात करेंगे ;

  • किसी को पहली बार दौरा पड़ रहा हो तो एंबुलेंस को बुलाए। 
  • दौरे 5 मिनट से अधिक समय तक बने रहने पर। 
  • व्‍यक्‍ति पूरी तरह से चेतना में नहीं आता है, या चेतना में लौटे बिना कई बार दौरे पड़ रहे हों, दौरा पड़ने के दौरान व्‍यक्‍ति बुरी तरह चोटिल हो गया हो तो एंबुलेंस का चुनाव जरूर से करें। 

सुझाव :

यदि आपके दौरे की समस्या काफी जटिल है। तो उपरोक्त बातो को ध्यान में रखते हुए आपको झावर ब्रेन हॉस्पिटल का जरूर से चुनाव करना चाहिए। क्युकि दौरे की समस्या पर समय सर रोक न लगाया जाए तो वो काफी खतरनाक साबित हो सकता है।

निष्कर्ष :

समस्या कोई भी उसका निपटारा तभी हो सकता है, जब उसके बारे में अच्छे से पता हो। लेकिन समस्या के बारे में पता होने पर कोई भी उपचार खुद से न करे बल्कि किसी अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करे।

क्या वाकई चुपचाप पड़ सकता है दिमाग के अंदर मिर्गी का दौरा? डॉक्टर से जानें इसके लक्षणों के बारे में!
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क्या वाकई चुपचाप पड़ सकता है दिमाग के अंदर मिर्गी का दौरा? डॉक्टर से जानें इसके लक्षणों के बारे में!

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  • May 9, 2026

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मिर्गी के कारण लक्षण व क्या है इसके इलाज ?

मिर्गी का दौरा पड़ने से व्यक्ति की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है, जिस कारण उसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मिर्गी की समस्या क्यों उत्पन होती है और इसके कारण क्या है, इसके इलावा इस दौरे के पड़ने पर हमे किस डॉक्टर के पास जाना चाहिए हम इसके बारे में आज के आर्टिकल में बात करेंगे ;

मिर्गी के दोर्रे के कारण क्या है ?

  • पहला और महत्वपूर्ण आनुवंशिक कारण है।

  • सिर पर घातक चोट का लगना।

  • ब्रेन ट्यूमर का होना।

  • एड्स की समस्या।

  • जन्म से पहले शिशु के सिर में चोट का लगना।

  • जन्म से मौजूद विकास संबंधित विकार या तंत्रिका संबंधित रोग आदि।

मिर्गी का दौरा क्या है ?

  • मिर्गी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से संबंधित विकार है, जिसकी स्थिति में मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिका की गतिविधि बाधित होती है। नतीजतन, मरीज को दौरे पड़ते हैं, वह बेहोश हो सकता है।

  • अधिकतर मामलों में मिर्गी के कारण पड़ने वाले दौरों से मस्तिष्क पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन कभीकभी दौरों के कारण मस्तिष्क को क्षति जरूर पहुंच सकती है।

मिर्गी का इलाज कौन करता है ?

  • इसके इलावा इलाज से पहले आपको डॉक्टर की डिग्री पर भी खास ध्यान रखना चाहिए।

मिर्गी का दौरा पड़ने के तुरंत बाद क्या करें ?

मिर्गी का दौरा अगर पड़े तो आपको पहले तो ये देखना है कि मरीज़ की स्थिति कैसी है, इसके इलावा निम्न बातो का भी आपको खास ध्यान रखना चाहिए ;

  • इस बीमारी से जूझ रहे लोगों को तनाव बिल्कुल भी नही लेना चाहिए।

  • साथ ही ऐसी जगह पर काम न करें जहां प्रेशर हो, जितना हो सके खुश रहें और अपने दिमाग को आराम दें, क्युकि रिलैक्स होने से मांसपेशियों को भी काफी आराम मिलता है। और अपने रुटीन में मेडिटेशन, योग को जरूर शामिल करें।

मिर्गी के लक्षण क्या है ?

इसके लक्षण कई तरह के हो सकते है, जैसे;

  • अचानक गुस्सा आना।

  • एक ही जगह पर घूमते रहना।

  • मेमोरी का लॉस होना।

  • कुछ समय के लिए कुछ भी याद न रहना।

  • बिना किसी कारण के स्तब्ध रह जाना।

  • अचानक खड़ेखड़े गिर जाना।

  • चेहरे, गर्दन और हाथ की मांसपेशियों में बारबार झटके आना।

मिर्गी में कौनसा उपचार सहायक है ?

मिर्गी में काफी उपचार सहायक माने जाते है, जिनमे से कुछ को हम निम्न में प्रस्तुत कर रहे है ;

  • इसके इलावा एंटीएपिलेप्टिक दवाएं लेने से मिर्गी के दौरे को कम किया जा सकता है।

  • वेगस तंत्रिका उत्तेजना, इसका उपयोग तब किया जाता है, जब मिर्गी का दौरा ज्यादा बढ जाए ।

  • जिन लोगों में मिर्गी के दौरे दवाओं से कंट्रोल नहीं होते, उन्हें डॉक्टर उच्च वसा और कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट वाले आहार लेने का सुझाव देते हैं।

  • मस्तिष्क का जो हिस्सा दौरे के कारण बनता है, उसे अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट मस्तिष्क की सर्जरी के माध्यम से सही कर देते है।

  • मिर्गी का इलाज डॉक्टर शुरुआती तौर पर कुछ मिर्गी की दवाइयां देकर सही करते है।

उपरोक्त उपचार के बारे में तो आपने जान ही लिया है, यदि मिर्गी के दौरे से आप भी परेशान है और इसका उपचार करवाना चाहते हो तो झावर हॉस्पिटल से जरूर संपर्क करे, क्युकि इस हॉस्पिटल में मिर्गी की सर्जरी को अनुभवी डॉक्टरों के द्वारा किया जाता है।

निष्कर्ष :

मिर्गी के दौरे के हल्के लक्षण दिखने पर इसे नज़रअंदाज़ न करे बल्कि इसका इलाज अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट के सम्पर्क में आकर जरूर करवाए।

क्या वाकई चुपचाप पड़ सकता है दिमाग के अंदर मिर्गी का दौरा? डॉक्टर से जानें इसके लक्षणों के बारे में!
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  • May 6, 2026

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स‍िर के बाएं तरफ हो रहे दर्द के कारण और इलाज

स‍िर के बाएं तरफ हो रहे दर्द के कारण का इलाज न्यूरो डॉक्टर से जाने!

स‍िर के बाई तरफ दर्द क्यों होता हैं ?

सिर में बाई और दर्द के अनेक कारण हो सकते हैं, जिनका वर्णन हम इस लेख में प्रस्तुत करेंगे

  • अगर आपके स‍िर के बाईं ओर दर्द हो रहा है, तो उसे नजरअंदाज न करें। क्युकि इसके पीछे कुछ ठोस कारण हो सकते हैं। माइग्रेन और ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमार‍ियां होने पर भी स‍िर के बाईं ओर दर्द हो सकता है। 
  • इसमें सिरदर्द बाईं साइड समेत सिर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। माइग्रेन से होने वाला सिरदर्द- माइग्रेन के कारण बाईं ओर मध्यम से गंभीर सिरदर्द हो सकता है। 

स‍िर में बाई तरफ दर्द के क्या कारण हैं ?

सिर में बाई तरफ दर्द के अनेक कारण मानें जाते हैं, जिनका वर्णन हम निम्न में प्रस्तुत कर रहें हैं ;

  • माइग्रेन, की समस्या होने पर आपको सिर के बाई तरफ दर्द का आभास होता हैं।  तो वही दर्द के साथ जी म‍िचलाना, उल्‍टी, चक्‍कर के संकेत भी आपमें नज़र आ सकते हैं। 
  • नींद में कमी की वजह से भी आपके सिर के बाई और तेज दर्द हो सकता हैं। 
  • यदि आपके सिर की कोई सर्जरी हुई हो तो भी आपके सिर के बाई और दर्द हो सकता हैं। 
  • आंख के अंदर दबाव पड़ने पर ग्‍लूकोमा नाम की बीमारी भी दर्द का कारण हैं। 
  • ब्रेन ट्यूमर को भी सिर के बाई और दर्द का कारण माना जाता हैं। 

यदि सिर के बाई और दर्द का कारण बढ़ता जा रहा हैं तो इसे बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ न करते हुए बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करें। 

सिर के बाई और दर्द होने का इलाज क्या हैं ?

सिर में दर्द होने के इलाज को डॉक्टर मरीज़ के दर्द के हिसाब से करते हैं, जैसे

  • दर्द दूर करने के ल‍िए डॉक्‍टर की सलाह पर पेनक‍िलर का सेवन आप कर सकते हैं।
  • स‍िर के एक तरह दर्द होने पर डॉक्‍टर आपको व‍िटाम‍िन्‍स या सप्‍लीमेंट्स लेने की सलाह जरूर देंगे।
  • बाई और दर्द होने पर स‍िर, गर्दन में गरम या ठंडे पानी से सिंकाई जरूर करें।
  • शुगर लेवल लो है, तो कुछ खा लें। क्युकि कुछ न खाने की वजह से भी सिर में तेज दर्द हो सकता हैं।   
  • नीलग‍िरी तेल से माल‍िश करके भी आप दर्द से राहत पा सकते है।

लेकिन इन सब के सेवन को खुद पर आजमाने से पहले आप डॉक्टर से जरूर एक बार सलाह ले। 

सिर के बाई और दर्द क्यों होता हैं इसके कारणों को तो आपने जान ही लिया है, लेकिन इसको जानने के बाद भी आप सतर्क नहीं होते तो इसका खामियाजा आपको काफी खतरनाक देखने को मिलता हैं। 

तो वही यदि आप इस बीमारी का खात्मा जड़ से करना चाहते हैं तो इसके लिए आप झावर न्यूरोलॉजिस्ट हॉस्पिटल का चुनाव भी कर सकते हैं। क्युकि यहाँ पर डॉ सुखदीप सिंह झावर के द्वारा मरीज़ से अच्छे से बात करके उसकी बीमारी को जानने के बाद इनके द्वारा मरीज़ का इलाज किया जाता हैं। तो वहीं इलाज के दौरान इस हॉस्पिटल में आधुनिक उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जाता हैं। 

निष्कर्ष :

यदि आपको भी सिर में बाई और दर्द का आभास हो रहा हैं तो कृपया इसे नज़रअंदाज़ न करें, बल्कि समय रहते किसी अच्छे डॉक्टर का चुनाव अपनी परेशानी को हल करने के लिए करें। क्युकि आप सभी जानते हैं कि समय पर किया गया कोई भी कार्य आपको हमेशा लाभ ही पहुंचाता हैं।

क्या वाकई चुपचाप पड़ सकता है दिमाग के अंदर मिर्गी का दौरा? डॉक्टर से जानें इसके लक्षणों के बारे में!
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