स्ट्रोक पुनर्वास क्या है और ये कैसे हमारे दिमाग के साथ संबंधित है?

स्ट्रोक पुनर्वास एक ऐसा उपचार माना जाता है, जिसमे स्ट्रोक या दिमागी दौरे के कारण हमारा दिमाग सही से कार्य करने में असमर्थ होता है तो उसको फिर से ठीक किया जा सकता है। स्ट्रोक पुनर्वास की मदद से व्यक्ति जो भी दिमागी तौर पर समस्या का सामना कर रहें होते है उससे वो आसानी से निजात पाने में सक्षम हो पाते है, स्ट्रोक पुनर्वास  क्या है, इसमें कौन-कौन से लोग शामिल है के बारे में अगर आप जानना चाहते है, तो इसके लिए लेख के साथ अंत तक बने रहें ;

स्ट्रोक पुनर्वास क्या है ?

  • स्ट्रोक पुनर्वास को सरल भाषा में समझने की कोशिश करें तो इसमें हम पुनर्वास की मदद से दिमागी नुकसान को आसानी से वापस पा सकते है। पुनर्वास के दौरान ज्यादातर लोग ठीक हो जाते है। हालांकि, कई पूरी तरह से ठीक नहीं होते है। 
  • त्वचा कोशिकाओं के विपरीत, तंत्रिका कोशिकाएं जो मर जाती है वे ठीक नहीं होती है और उन्हें नई कोशिकाओं द्वारा प्रतिस्थापित नहीं किया जाता है। हालांकि, मानव मस्तिष्क अनुकूलनीय है। क्षतिग्रस्त मस्तिष्क कोशिकाओं का उपयोग करके लोग कार्य करने के नए तरीके सीख सकते है।
  • यह पुनर्वास अवधि अक्सर एक चुनौती होती है। 
  • वहीं इसमें रोगी और परिवार नर्सों और डॉक्टरों के साथ शारीरिक, व्यावसायिक और भाषण चिकित्सक की एक टीम के साथ काम करते है। तो इस प्रक्रिया में अधिकांश सुधार प्रक्रिया के पहले तीन से छह महीनों में होंगे। लेकिन कुछ लोग लंबी अवधि में अच्छी प्रगति कर सकते है।

स्ट्रोक पुनर्वास में क्या शामिल हो सकते है ?

  • लोगों को स्ट्रोक से बाहर निकालने के लिए कई दृष्टिकोण सहायक माने जाते है। लेकिन कुल मिलाकर, पुनर्वास विशेष रूप से केंद्रित और दोहराए जाने वाले कार्यों पर केंद्रित है। वहीं एक ही चीज़ का बार-बार अभ्यास करना। आपकी पुनर्वास योजना आपके स्ट्रोक से प्रभावित शरीर के हिस्से या क्षमता के प्रकार पर निर्भर कर सकती है।

स्ट्रोक से निजात पाने के लिए निम्नलिखित शारीरिक पुनर्वास की गतिविधियां शामिल हो सकती है, जैसे ;

  • मोटर-कौशल व्यायाम, की प्रक्रिया में व्यायाम पूरे शरीर में मांसपेशियों की ताकत और समन्वय को बेहतर बनाने में मदद कर सकते है। इनमें संतुलन, चलने और यहां तक ​​कि निगलने के लिए उपयोग की जाने वाली मांसपेशियां शामिल हो सकती है।
  • गतिशीलता प्रशिक्षण, में आप वॉकर, बेंत, व्हीलचेयर या टखने के ब्रेस जैसे गतिशीलता उपकरणों का उपयोग करना सीख सकते है। जब आप फिर से चलना सीखते है तो टखने का ब्रेस आपके शरीर के वजन को सहारा देने में मदद करने के लिए आपके टखने को स्थिर और मजबूत कर सकता है।

फिर पुनर्वास में संज्ञानात्मक और भावनात्मक गतिविधियां शामिल है, जैसे ;

  • संज्ञानात्मक विकारों के लिए थेरेपी. व्यावसायिक थेरेपी और स्पीच थेरेपी आपको स्मृति, प्रसंस्करण, समस्या-समाधान, सामाजिक कौशल, निर्णय और सुरक्षा जागरूकता जैसी खोई हुई संज्ञानात्मक क्षमताओं में मदद कर सकती है।
  • संचार विकारों के लिए थेरेपी, में स्पीच थेरेपी आपको बोलने, सुनने, लिखने और समझने की खोई हुई क्षमताओं को वापस पाने में मदद कर सकती है।
  • मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और उपचार, आपके भावनात्मक समायोजन का परीक्षण किया जा सकता है। आप परामर्श भी ले सकते है या किसी सहायता समूह में भाग ले सकते है।
  • आपके डॉक्टर इस समस्या से निजात दिलवाने के लिए आपको एक एंटीडिप्रेसेंट या ऐसी दवा लेने की सिफारिश कर सकते है जो सतर्कता, उत्तेजना या गतिविधि को प्रभावित करती है।

स्ट्रोक पुनर्वास को कब शुरू करना चाहिए ? 

  • जितनी जल्दी आप स्ट्रोक पुनर्वास शुरू करेंगे, आपकी खोई हुई क्षमताएं और कौशल आप उतनी जल्दी वापस पाने की सक्षम हो पाएगे।
  • आपके स्ट्रोक के 24 से 48 घंटों के भीतर, जब आप अस्पताल में हों, तो स्ट्रोक पुनर्वास शुरू होना आम बात है।

स्ट्रोक पुनर्वास से बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट के संपर्क में आना चाहिए।

स्ट्रोक पुनर्वास को शरीर के किस हिस्से पर किया जाता है ?

  • पुनर्वास आमतौर पर स्ट्रोक के बाद अस्पताल में शुरू होता है। यदि आपकी स्थिति स्थिर है, तो स्ट्रोक के दो दिनों के भीतर पुनर्वास शुरू हो सकता है और अस्पताल से आपकी रिहाई के बाद तक जारी रह सकता है। 
  • वहीं स्ट्रोक पुनर्वास शरीर के विभिन्न हिस्सों पर किया जा सकता है, जो स्ट्रोक के परिणामस्वरूप व्यक्ति द्वारा अनुभव की जाने वाली विशिष्ट हानि और विकलांगता पर निर्भर करती है।
  • यहां शरीर के कुछ सामान्य क्षेत्र है, जो स्ट्रोक पुनर्वास के कारण प्रभावित होते है ;
  • ऊपरी अंग यानी बाहें और हाथ। 
  • निचले छोर यानि पैर के हिस्से आदि।

स्ट्रोक के कारण आपके शरीर और दिमाग पर काफी गहरा प्रभाव पड़ा है, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन का चयन करना चाहिए।

स्ट्रोक पुनर्वास में कौन-सी टीम शामिल होती है ?

  • अनुभवी डॉक्टरों की टीम इसमें शामिल होती है। 
  • पुनर्वास नर्सें भी इस टीम में शामिल होती है। 
  • अगर आप चलने फिरने में असमर्थ है भौतिक चिकित्सक की टीम भी आपके देखभाल में शामिल हो सकती है 
  • व्यावसायिक चिकित्सक की टीम का शामिल होना।  
  • भाषण और भाषा रोगविज्ञानी का शामिल होना। 
  • सामाजिक कार्यकर्ता का शामिल होना। 
  • मनोवैज्ञानिक का शामिल होना। 
  • चिकित्सीय मनोरंजन विशेषज्ञ का शामिल होना। 
  • व्यावसायिक परामर्शदाता का शामिल होना आदि।

सुझाव :

स्ट्रोक या दिमागी दौरे के कारण अगर आपका शरीर ठीक तरीके से कार्य करने में असमर्थ है तो इससे बचाव के लिए आपको जल्द डॉक्टर के सम्पर्क में आना चाहिए और स्ट्रोक या स्ट्रोक से पुनर्वास की मदद से आप इस समस्या से खुद का बचाव आसानी से कर सकते है। इसके अलावा आप चाहे तो इसका इलाज झावर हॉस्पिटल से भी करवा सकते है।

निष्कर्ष :

स्ट्रोक की समस्या काफी गंभीर है लेकिन पुनर्वास की मदद से आप इस तरह की समस्या से खुद का बचाव आसानी से करवा सकते है और स्ट्रोक की समस्या से भी खुद का बचाव कर सकते है, पर ध्यान रहें स्ट्रोक की समस्या आने पर आप किसी भी तरह की दवाई को खुद से न लें जब तक डॉक्टर से परामर्श न लें।

स्ट्रोक पुनर्वास क्या है और ये कैसे हमारे दिमाग के साथ संबंधित है?
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स्ट्रोक या मस्तिष्क दौरे के क्या है – कारण, लक्षण और बचाव के तरीके !
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स्ट्रोक या मस्तिष्क दौरे के क्या है – कारण, लक्षण और बचाव के तरीके !

आज के समय में स्ट्रोक, या मस्तिष्क का दौरा बढ़ते काम को लेकर कोई बड़ी बात नहीं है, वहीं ये दौरा मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह में अचानक कमी या…

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दिमाग में खून का जमना मतलब जान को खतरा – जानिए क्या है इसके लक्षण, कारण और उपचार !

मस्तिष्क जिसको मानव शरीर में सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक माना जाता है। क्युकी इसके ऊपर ही हमारा सम्पूर्ण शरीर टीका होता है। वहीं मानव मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र के कमांड सेंटर के रूप में कार्य करता है। यह अंग बुद्धि का स्थान, इंद्रियों के विचार व्याख्याता, शरीर की गति का आरंभकर्ता और व्यवहार का नियंत्रक है। इसके अलावा मस्तिष्क में रक्त के जमाव के कारण क्या है और इससे हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है, ये गौर करने वाली बात है ;

क्या है दिमाग में रक्त का जमाव ?

  • रक्त के थक्के रक्त के जेल जैसे गुच्छे में होते है। वे घायल रक्त वाहिकाओं को प्लग करने के लिए फायदेमंद होते है, जिससे रक्तस्राव बंद हो जाता है। जब थक्के बनते है और स्वाभाविक रूप से नहीं घुलते है, तो उन्हें चिकित्सा देखभाल की खास आवश्यकता हो सकती है, खासकर यदि वे आपके पैरों में है या अधिक महत्वपूर्ण स्थानों पर है, जैसे कि आपके फेफड़े और मस्तिष्क में। 
  • वहीं स्ट्रोक तब होता है, जब आपके मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित या कम हो जाती है, जिससे मस्तिष्क के ऊतकों को ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते है। जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं मिनटों में मरने लगती है। और ऐसा तब होता है जब मस्तिष्क को आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिका में थक्का जम जाता है।
  • दिमाग में खून का जमना या स्टोक की समस्या को अच्छे से जानने के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट से सम्पर्क करना चाहिए।

लक्षण क्या है दिमाग में खून जमने के ?

  • इसके लक्षणों का असर सबसे पहले आपके आँखों में पड़ेगा जैसे आपको धुंधली और अँधेरी दृष्टि का सामना करना पड़ सकता है। 
  • आपको बोलने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। 
  • चेहरे के दोनों ओर का लंबे समय तक सुन्न रहना, यदि आप इस लक्षण का अनुभव कर रहे है, तो आपको तुरंत लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन से परामर्श लेना चाहिए। 
  • मस्तिष्क में रक्त के थक्के बनने से रोगी के शरीर के दोनों ओर आंशिक पक्षाघात हो सकता है। पक्षाघात आमतौर पर अंगों को प्रभावित करता है, और कुछ मामलों में, चेहरे के एक तरफ को भी प्रभावित कर सकता है।
  • ब्रेन स्ट्रोक के कारण व्यक्ति अपने हाथों और पैरों का संतुलन या समन्वय खो बैठता है। 
  • ब्रेन स्ट्रोक के कुछ मामलों में, जब मस्तिष्क के ओसीसीपिटल लोब को टेम्पोरल लोब से जोड़ने वाले मार्गों में क्षति होती है, तो व्यक्ति विज़ुअल एग्नोसिया से पीड़ित हो सकता है। विज़ुअल एग्नोसिया आपके सामने रखी बड़ी संख्या में वस्तुओं को पहचानने में असमर्थता का सामना करवा सकता है। आपको अचानक एक या दोनों आंखों में धुंधला या काला दिखाई दे सकता है, या आपको दोगुना दिखाई दे सकता है।
  • अचानक गंभीर सिरदर्द , जो उल्टी , चक्कर आना या परिवर्तित चेतना के साथ हो सकता है, वहीं यह संकेत दे सकता है कि आपको स्ट्रोक हो रहा है।

दिमाग में खून जमने के क्या कारण है ?

  • डायबिटीज के कारण। 
  • हाई बीपी के कारण। 
  • हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण। 
  • दिल का कोई रोग होना।  
  • मोटापे के कारण।  
  • स्मोकिंग के कारण। 
  • चिंतन के कारण। 
  • एक्सरसाइज न करने के कारण भी इस तरह की समस्या का व्यक्ति को सामना करना पड़ सकता है। 
  • कम मात्रा में मांसाहारी व उच्च वसायुक्त भोजन का सेवन करना।

दिमाग में खून जमने से बचाव के लिए क्या करें ?

  • सबसे पहले तो दिमाग में खून जमने की समस्या होने पर आपको स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखना चाहिए। स्वस्थ भोजन करना, नियमित व्यायाम करना और स्वस्थ नींद को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। 
  • धूम्रपान और मनोरंजक दवाओं से जितना हो सकें परहेज करें।  
  • तनाव उत्पन्न करने वाले कारकों से आपको बचना चाहिए। 
  • खुद को जितना हो सकें हाइड्रेटेड रखें। 
  • नियमित अपने स्वास्थ्य की जांच को करवाते रहें।

दिमाग में खून जमने से बचाव का इलाज क्या है ?

  • इसके इलाज के लिए आपको आपातकालीन IV इंजेक्शन दवा दी जाती है। वहीं ऐसी दवाओं व थेरेपी से थक्के को तोडा जा सकता है, जिससे आपको काफी आराम मिलेगा।   
  • एंटीकोआगुलंट्स, जिन्हें अक्सर रक्त पतला करने वाले के रूप में जाना जाता है, और ये रक्त के थक्कों को बनने से रोकने में भी मदद करते है। 
  • कैथेटर-निर्देशित थ्रोम्बोलिसिस में रक्त के थक्के में एक कैथेटर भेजना शामिल है। सीधे थक्के पर दवा प्रदान करके, कैथेटर इसके विघटन में सहायता करता है। थ्रोम्बेक्टोमी सर्जरी के दौरान, डॉक्टर रक्त के थक्के को नाजुक ढंग से हटाने के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग भी करते है।
  • वहीं डॉक्टर यह निर्धारित कर सकते है कि धमनी को खुला रखने और रुकावटों को रोकने के लिए स्टेंट की आवश्यकता है या नहीं।
  • इसके अलावा जब कोई रोगी डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) से पीड़ित और रक्त को पतला करने वाली दवाएं लेने में असमर्थ हो, तो उनके हृदय, फेफड़े और मस्तिष्क तक पहुंचने से पहले रक्त के थक्कों को फंसाने के लिए उनके अवर वेना कावा (शरीर की सबसे बड़ी नस) में एक फिल्टर डाला जाता है।

आप चाहें तो अपने दिमाग में जमे खून का इलाज झावर हॉस्पिटल से भी करवा सकते है, वहीं इस हॉस्पिटल में अनुभवी डॉक्टरों के द्वारा मरीज़ का इलाज किया जाता है।

स्ट्रोक पुनर्वास क्या है और ये कैसे हमारे दिमाग के साथ संबंधित है?
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  • September 25, 2023

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स्ट्रोक या मस्तिष्क दौरे के क्या है – कारण, लक्षण और बचाव के तरीके !
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दिमाग में भर रहें पानी के लक्षणों पर ध्यान न देने से कैसे फट सकती है इसकी नसें ?

अक्सर हमने फेफड़ो में पानी भरने के बारे में जरूर सुना होगा पर दिमाग में पानी भरने के बारे में बहुत कम ही सुनने को मिलता है तो अगर आप में से किसी में भी सिर दर्द की समस्या ज्यादा समय तक रहती है तो इसके लक्षणों के बारे में जानकारी जरूर हासिल करें। क्युकी कई बार सिर का दर्द दिमाग में पानी भरने जैसी समस्या को उत्पन्न कर सकता है ;

दिमाग में पानी का भरना क्या है ?

  • आमतौर पर सेरिब्रल स्पाइनल फ्लूइड (CSF) दिमाग में वेंट्रिकल्स कहे जाने वाले क्षेत्रों से होकर बहता है। यह पदार्थ दिमाग में पोषक तत्व भेजने और गंदे पदार्थों को हटाने का काम करता है। इतना ही नहीं, यह दिमाग और रीढ़ की हड्डी को साफ करता है और उन्हें चोट से बचाता है। 
  • वहीं आपका शरीर रोजाना इस पदार्थ को उतनी मात्रा में बनाता है जितनी जरूरत होती है। उसके बाद उसे अवशोषित भी कर लेता है। कई बार यह शरीर द्वारा अवशोषित नहीं हो पाता है जिससे यह शरीर में जमा होता रहता है। इसका निर्माण ज्यादा होने से आपके सिर के अंदर दबाव बढ़ जाता है। जिससे यह दिमाग को सही तरह से काम करने से रोकता है।

दिमाग में पानी का भरना क्या है के बारे में और विस्तार से जानने के लिए आप लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट के संपर्क में आए।

दिमाग में पानी भरने के कारण क्या है ?

  • दिमाग में पानी का भरना दो तरह से होता है पहला जन्म के दौरान पैदा हुए बच्चे के दिमाग में पानी का भरना। 
  • दूसरा किसी आम इंसान के दिमाग में पानी भरना जिसके कई कारण हो सकते है। ऐसा माना जाता है कि सिर में चोट, स्ट्रोक, ब्रेन स्पाइनल कोड ट्यूमर और मेनिनजाइटिस या दिमाग या रीढ़ की हड्डी के अन्य संक्रमण के कारण भी ऐसा होता है।

छोटे और बड़े बच्चो के दिमाग में पानी भरने के लक्षण !

  • इसके लक्षण उम्र के साथ बदलते है। 
  • बच्चों के दिमाग में पानी भरने के लक्षणों में उसका सिर असामान्य रूप से बड़ा दिखना, बच्चे के सिर के ऊपर उभरा हुआ नरम स्थान (फॉन्टानेल) दिखना, आंखों से जुड़ी समस्या, उल्टी या नींद नहीं आना आदि शामिल है। 
  • वहीं अगर बात करें बड़े बच्चों के दिमाग में पानी भरने के लक्षणों की तो इनमें सिरदर्द, मतली और उल्टी, आंखों की समस्या, शरीर का सही तरह विकास न होना आदि शामिल है।

अगर बच्चों में पानी भरने के लक्षण ज्यादा गंभीर है तो इसके लिए आप लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन की सलाह भी ले सकते है।

वयस्कों और बुजुर्गों के दिमाग में पानी भरने के लक्षण !

  • सिरदर्द का होना। 
  • उल्टी या मतली की समस्या।  
  • आंखों की समस्या। 
  • थकान का महसूस होना। 
  • संतुलन और समन्वय बनाने में समस्या का सामना करना। 
  • अल्पकालिक स्मृति की हानि। 
  • चलने में समस्या का सामना करना। 
  • डिमेंशिया की शिकायत। 
  • मूत्राशय से जुड़ी समस्या आदि।

दिमाग में पानी भरने का इलाज क्या है ?

  • शुरुआती निदान और सफल उपचार से अच्छी रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है। हाइड्रोसिफलस को रोकने या ठीक करने का कोई तरीका नहीं है, लेकिन इस स्थिति का इलाज सर्जरी से किया जा सकता है।
  • पर ध्यान रखें अपने दिमाग की सर्जरी को उन्ही से करवाए जिन डॉक्टर को दिमाग की सर्जरी करने का काफी सालों का अनुभव है।

दिमाग के इलाज के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

अगर आप दिमाग में पानी भरने की समस्या का सामना कर रहें है तो इसके इलाज के लिए आपको झावर हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। वही आपको बता दे की अगर आपमें उपरोक्त दिमाग में पानी भरने जैसे लक्षण नज़र आ रहें है, तो इससे बचाव के लिए आपको समय रहते सर्जरी का चयन कर लेना चाहिए। 

 

 

स्ट्रोक पुनर्वास क्या है और ये कैसे हमारे दिमाग के साथ संबंधित है?
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  • September 25, 2023

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  • September 15, 2023

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जानिए ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना कैसे पड़ सकता है भारी !

कैंसर जिसका नाम सुनते ही लोगों के पैरों तले जमीन खिसक जाती है, और साथ ही ये काफी खतरनाक बीमारी में से एक मानी जाती है। वही अगर व्यक्ति को ब्रेन ट्यूमर हो जाए तो वो कैसे खुद का बचाव कर सकता है साथ ही कैंसर के लक्षणों को जानकर हम कैसे इसको पहचाने इसके बारे में आज के लेख में बात करेंगे, तो आप या आपके करीबियों में से कोई इस तरह की समस्या का सामना कर रहा है तो कैसे वो खुद को इस तरह की समस्या से बाहर निकाल सकता है इसके बारे में आज के आर्टिकल में बात करेंगे ;

क्या है दिमाग का कैंसर ?

ब्रेन ट्यूमर में दिमाग की कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा तेजी से बढ़ने और फैलने लगती है, जिससे आस-पास मौजूद टीश्यूज और ऑर्गन डैमेज हो जाते है। और यही ख़राब हुए ऑर्गन आपमें कैंसर जैसे खतरनाक बीमारी को उत्पन्न करते है।

दिमाग के कैंसर का पता कैसे लगाए ?

  • दिमाग के कैंसर का पता लगाने के लिए आप न्यूरोलॉजिकल जांच, सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन, और पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (PET) स्कैन करवा सकते है। 
  • वही इन सभी जांचों में कैंसर कोशिकाओं की जांच के लिए मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के चारों ओर तरल पदार्थ का एक छोटा सा नमूना एकत्र किया जाता है।

दिमाग के कैंसर का पता लगाने के बाद आप बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन भी कर सकते है।

ब्रेन ट्यूमर के कितने प्रकार है ?

सामान्यतः मस्तिष्क के कैंसर को दो भागों में बाटा जाता है;

  • पहला जिसे प्राइमरी कैंसर कहा जाता है और ये कैंसर दिमाग के जिस हिस्से में शुरू होता है, बस वहीं बढ़ता रहता है। 
  • जबकि सेकेंडरी कैंसर की बात करें तो इस कैंसर की शुरुआत शरीर के किसी एक हिस्से में होती है, जिसके बाद ये शरीर के दूसरे हिस्से जैसे- दिमाग, फेफड़े, ब्रेस्ट, किडनी, कोलोन और स्किन में फैल जाते है।

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण क्या है ?

ब्रेन ट्यूमर के कुछ लक्षण हम निम्न प्रस्तुत कर रहें है ;

  • अगर आपको बिना किसी बीमारी के लगातार सिर में तेज दर्द रहता है तो ये ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता है। 
  • चक्कर या उल्टी महसूस करना, हालांकि, ये लक्षण कई समय बाद देखने को मिलते है. लेकिन कई बार ब्रेन ट्यूमर के शुरुआत में ही ये लक्षण सामने आ जाते है, ऐसा कैंसर की कोशिकाओं का दिमाग में मौजूद फ्लूड के साथ मिक्स होने पर भी होता है। 
  • जब शरीर में कुछ बदलाव दिखने लगे जैसे याददाश्त का कमजोर होना, व्यक्तित्व में बदलाव दिखाई देने लगें तो ये भी ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हो सकते है। 
  • इसके अलावा आप कैंसर के लक्षणों में धुंधली दृष्टि, का दोहरा दिखना जैसा कुछ मेहसूस कर सकते है।
  • एक हाथ या एक पैर का काम नहीं करना। 
  • शरीर और दिमाग का बैलेंस बना पाने में मुश्किल का सामना करना। 
  • बोलने में परेशानी का आना। 
  • उलझन महसूस करना आदि।

ब्रेन ट्यूमर से बचाव के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

अगर आप या आपके परिजन में से कोई भी इस घातक बीमारी का सामना कर रहें है या इस बीमारी के लक्षण उनमे नज़र आ रहें हो तो इससे बचाव के लिए आपको झावर हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए, वही आपको बता दे की इस हॉस्पिटल में अनुभवी डॉक्टरों के द्वारा आधुनिक उपकरणों की मदद से मरीजों का इलाज किया जाता है। 

निष्कर्ष :

मस्तिष्क का कैंसर बहुत ही खतरनाक माना जाता है, क्युकि दिमाग ही एक ऐसा पार्ट होता है जिसके माध्यम से हमारा पूरा शरीर टिका हुआ हुआ है, इसलिए अगर आपको उपरोक्त में से सामान्य लक्षण भी आप में नज़र आए, तो जल्द ही डॉक्टर का चयन करें, वर्ना दिमागी कैंसर से आपकी जान भी जा सकती है।

स्ट्रोक पुनर्वास क्या है और ये कैसे हमारे दिमाग के साथ संबंधित है?
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  • September 25, 2023

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स्ट्रोक या मस्तिष्क दौरे के क्या है – कारण, लक्षण और बचाव के तरीके !
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स्ट्रोक या मस्तिष्क दौरे के क्या है – कारण, लक्षण और बचाव के तरीके !

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  • September 15, 2023

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क्यों हकलाता है आपका बच्चा? जानें इसके लक्षण और इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है?

हकलाने की समस्या जोकि हम छोटे बच्चों में अकसर देखते है पर जरा सोचे अगर आपका बच्चा बड़ा जो जाए उसके बाद भी इस तरह की समस्या का सामना कर रहा हो तो कैसे हम ऐसे में बच्चे का बचाव कर सकते है। वही छोटे बच्चों में हकलाने के क्या है कारण, प्रकार और कैसे लक्षणों की मदद से हम इस तरह के बच्चों को ठीक कर सकते है इसके बारे में आज के आर्टिकल में बात करेंगे ;

क्या है हकलाने की समस्या ?

  • हकलाना जिसे अंग्रेजी में स्टैमरिंग या स्टटरिंग कहा जाता है, जो एक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है। वही इस कंडीशन में व्यक्ति सामान्य रूप से बोल पाने की क्षमता को खो देता है। इसमें आमतौर पर व्यक्ति सामान्य रूप से बोलने की जगह बोलते समय किसी शब्द या अक्षर को बार-बार बोलने लगता है या फिर शब्द की ध्वनि को लंबा बना देते है। 
  • हकलाने से जुड़ी समस्याएं आमतौर पर 4 से 7 साल के बच्चों में देखी जाती है। ऐसा आमतौर पर इसलिए होता है, क्योंकि इस उम्र में बच्चे शब्दों को जोड़कर और उनका वाक्य बनाकर बोलना सीखने लगते है।

यदि आप या आपके बच्चे में हकलाने की समस्या उत्पन्न हो गई है तो इससे बचाव के लिए आपको बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करना चाहिए।

हकलाने की समस्या के कारण क्या है ?

  • सबसे पहले तो इसके कारण में फैमिली हिस्ट्री शामिल है। 
  • फिर न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर का आना।  
  • स्पीच सुनने या लैंग्वेज को समझने में दिक्कत का आना भी इसके एक कारण में शामिल है।

हकलाने के लक्षण क्या है ?

  • हकलाने के लक्षणों में सबसे पहले तो व्यक्ति किसी भी बात को शुरू करने से पहले डरता है और बात करते वक़्त वो हिचकिचाहत महसूस करता है। 
  • रुक-रुक कर बोलना, एक ही शब्द को बार-बार बोलना, तेज बोलना, बोलते हुए आंखें भींचना, होठों में कंपकपाहट होना, जबड़े का हिलना आदि। उच्चारण की समस्या होना और साफ न बोल पाना।

हकलाने के प्रकार क्या है ?

  • डेवलपमेंटल स्टैमरिंग, यह हकलाने का सबसे आम प्रकार है, जो आमतौर पर बचपन के शुरुआती दौर में देखा जाता है।
  • एक्वायर्ड स्टैमरिंग, इसे लेट स्टैमरिंग कहा जाता है, इसके अन्य कुछ प्रकार भी हैं जैसे –
  • न्यूरोजेनिक स्टैमरिंग, यह आमतौर पर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में किसी प्रकार की क्षति होने के कारण होता है।
  • साइकोजेनिक स्टैमरिंग, यह हकलाने की समस्या का एक असामान्य प्रकार है, जिसका मतलब है कि इसके मामले कम देखे जाते है।

हकलाने का इलाज क्या है ?

  • हकलाने की समस्या का इलाज अनुभवी डॉक्टर स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट के द्वारा करते है, जिसमें वे मरीज के हकलाने की समस्या में सुधार करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते है। 
  • वही व्यक्ति को अगर किसी प्रकार की भावनात्मक समस्या के कारण हकलाने की समस्या हो रही है, तो अन्य साइकोलॉजिकल थेरेपी की मदद से स्थिति का इलाज किया जाता है। हालांकि, हकलाने की समस्या का इलाज आमतौर पर मरीज की उम्र, लक्षणों और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। 

सुझाव :

अगर आपका बच्चा कुछ ज्यादा ही हकला रहा है तो इससे बचाव के लिए आपको जल्द ही डॉक्टर के संपर्क में आना चाहिए और इसके इलाज के लिए आपको झावर हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

हकलाने की समस्या काफी गंभीर मानी जाती है, वही बाल्यावस्था में इस तरह की समस्या अगर बच्चों को हो जाए तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ता लेकिन ये समस्या अगर युवावस्था में हो जाए तो व्यक्ति को कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है जिस वजह से कई दफा वो डिप्रेशन में भी चला जाता है। वही इस तरह की समस्या का खात्मा जड़ से तो नहीं किया जा सकता लेकिन हां समय पर पता चलने पर इलाज के दौरान व्यक्ति को फ़ायदा दिलवाया जा सकता है।

स्ट्रोक पुनर्वास क्या है और ये कैसे हमारे दिमाग के साथ संबंधित है?
HindiStroke

स्ट्रोक पुनर्वास क्या है और ये कैसे हमारे दिमाग के साथ संबंधित है?

स्ट्रोक पुनर्वास एक ऐसा उपचार माना जाता है, जिसमे स्ट्रोक या दिमागी दौरे के कारण हमारा दिमाग सही से कार्य करने में असमर्थ होता है तो उसको फिर से ठीक…

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स्ट्रोक या मस्तिष्क दौरे के क्या है – कारण, लक्षण और बचाव के तरीके !
Stroke

स्ट्रोक या मस्तिष्क दौरे के क्या है – कारण, लक्षण और बचाव के तरीके !

आज के समय में स्ट्रोक, या मस्तिष्क का दौरा बढ़ते काम को लेकर कोई बड़ी बात नहीं है, वहीं ये दौरा मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह में अचानक कमी या…

  • September 15, 2023

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जानिए नस की बीमारी होने पर खुद से दवा लेना कैसे भारी पड़ सकता है ?

नसों का हमारे शरीर में महत्वपूर्ण स्थान होता है, क्युकी ये हमारे शरीर की रक्त की धाराओं को सम्पूर्ण शरीर में प्रयाप्त मात्रा में पहुंचाती है, पर जरा सोचें अगर किसी कारण इनमे किसी तरह की परेशानी आ जाए तो कैसे हम इस तरह की समस्या से खुद का बचाव कर सकते है। वही बहुत से लोगों के मन में आज ये सवाल होगा की सामान्य नसों में परेशानी होने पर खुद से दवाई ले या न ले, तो ऐसे प्रश्नो के बारे में हम आज के आर्टिकल में चर्चा करेंगे, इसलिए आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े ;

नस क्या होते है ?

  • नसें रक्त वाहिकाएं होती हैं जो रक्त को हृदय की ओर ले जाती है। वही मानव शरीर में दो प्रकार की नसें होती है, पहली गहरी नसें और दूसरी सतही नसें। 
  • वही गहरी नसों की बात करें तो ये नसें शरीर के भीतर गहरी स्थित होती है, जबकि सतही नसें त्वचा की सतह के करीब स्थित होती हैं और अक्सर दिखाई देती हैं।

नसों की कमजोरी क्या है ?

  • नसों की कमजोरी को मेडिकल के टर्म में न्यूरोपैथी के नाम से जाना जाता है। वहीं, बात जब संपूर्ण शरीर की नसों की कमजोरी की हो रही हो, तो उसके लिए मेडिकली टर्म के रूप में इसे पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता है। 
  • नसों की बात की जाए तो ये शरीर में किसी कम्प्यूटर के वायर की तरह काम करती है, जो शरीर की विभिन्न क्रियाओं को करने के लिए दिमाग तक संदेश पहुंचाती है। वही जब किसी वजह से ये नसें दिमाग तक ठीक तरह से संदेश पहुंचाने में विफल होती है या फिर नहीं पहुंचा पाती है, तो इसे ही नसों की कमजोरी के रूप में जाना जाता है। 

नसों में कमजोरी के लक्षण है ?

  • स्मरण शक्ति में क्षति का पहुंचना। 
  • सिर दर्द की समस्या। 
  • मांसपेशियों में अकड़न की समस्या। 
  • पीठ में दर्द की समस्या। 
  • झटके या दौरे का पड़ना। 

कारण क्या है नसों के कमजोरी के ?

  • किसी तरह की बीमारी का होना। 
  • किसी वजह से नसों पर दबाव का पड़ना। 
  • जेनेटिक समस्या का होना। 
  • दवाओं के दुष्प्रभाव, पोषण तत्वों में कमी या विषाक्त पदार्थ के कारण भी ऐसी समस्या हो सकती है। 

नसों में कमजोरी के कारणों के बारे में विस्तार से जानने के लिए लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करें। 

क्या नसों की बीमारी होने पर हम खुद से दवाई ले सकते है ?

  • नसों का हमारे शरीर में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है इसलिए अगर इनमे किसी भी तरह की समस्या आ जाए तो खुद से या किसी के कहने से दवा का सेवन न करें। बल्कि आपको नसों में कमजोरी महसूस हो रही है तो इसके लिए आप न्यूरो विशेषज्ञों से करें। 

नसों की कमजोरी को कैसे दूर किया जा सकता है ?

  • नियमित व्यायाम, उचित आराम, उचित स्वास्थ्य देखभाल की स्थिति और उचित और संतुलित आहार खाने से नसों की कमजोरी को ठीक किया जा सकता है।

नसों की कमजोरी की जाँच व इलाज के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

  • अगर आप भी नसों के कमजोरी की समस्या का सामना उपरोक्त जैसे कर रहें है तो इससे बचाव के लिए आपको झावर हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

स्ट्रोक पुनर्वास क्या है और ये कैसे हमारे दिमाग के साथ संबंधित है?
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स्ट्रोक या मस्तिष्क दौरे के क्या है – कारण, लक्षण और बचाव के तरीके !
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जानिए चक्कर आने के क्या है लक्षण, कारण, निदान व घरेलू उपचार ?

आज के समय की बात करें तो भाग-दौड़ भरी जिंदगी में खान-पान का अच्छे से ध्यान न रखना कही न कही चक्कर आने की गंभीर समस्या में शामिल है। वही चक्कर आने के दौरान व्यक्ति बेहोश, कमजोर या अस्थिर महसूस कर सकता है। इसके अलावा ये समस्या क्यों उत्पन्न होती है इसके कारण क्या है, और इसके लक्षणों को जानकर हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है इसके बारे में आज के आर्टिकल में बात करेंगे ;

चक्कर आने के कारण क्या है ?

चक्कर आने के कई कारण हो सकते है, जैसे-

  • वर्टिगो, बता दे की इस स्थिति में आस-पास की जगह या चीजें घूमती हुई मेहसूस होती है।
  • माइग्रेन से पीड़ित लोगों को चक्कर आने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। 
  • रक्तचाप में तेज या तेजी से गिरावट के कारण चक्कर का आना काफी गंभीर समस्या हो सकती है।
  • हृदय रोग भी चक्कर की समस्या को उत्पन्न कर सकता है। 
  • एनीमिया से पीड़ित लोगों को चक्कर आने का अनुभव हो सकता है। 

उपरोक्त चक्कर आने के कारण ज्यादा गंभीर है या नहीं के बारे में विस्तार से जानने के लिए बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना से संपर्क करें।

क्या है चक्कर का आना ?

  • चक्कर का आना एक ऐसा स्थिति है जो सुस्त, अस्थिर, लाइट-हेडेड या कमजोर होने की भावना से जुड़ा है। 
  • आमतौर पर असंतुलन यानी की डिस-इक्विलिब्रियम और वर्टिगो, चक्कर आने का मुख्य कारण होते है।
  • वही जब हमारे द्वारा अच्छी डाइट को नहीं लिया जाता है तब भी ये समस्या उत्पन्न होती है।

लक्षण क्या है चक्कर आने के ?

  • असामान्य रूप से हिलने-डुलने की अनुभूति जैसे कि एक तरफ से दूसरी तरफ हिलने का एहसास होना।
  • एक ऐसा एहसास जहां व्यक्ति को महसूस होता है कि वह घूम रहा है या उसके आस-पास की दुनिया घूम रही है।
  • असंतुलन या संतुलन खोने की भावना। 
  • उल्टी या मतली की अनुभूति आदि।

चक्कर से बचाव का घरेलू उपचार क्या है ?

  • अपना संतुलन खोने की संभावना से आपको अवगत रहना है, जिससे गिरने और गंभीर चोटें लग सकती है।
  • अतिरिक्त स्थिरता के लिए अचानक हिलने-डुलने से बचें।
  • अपने टब और शॉवर के फर्श पर फिसलन रहित चटाई का प्रयोग करें।
  • चक्कर आने पर तुरंत बैठ जाएं या लेट जाएं। 
  • यदि आप बिना किसी चेतावनी के बार-बार चक्कर आने का अनुभव करते है, तो कार चलाने या भारी मशीनरी चलाने से बचें।
  • कैफीन, शराब, नमक और तंबाकू के सेवन से बचें। इन पदार्थों का अत्यधिक उपयोग आपके संकेतों और लक्षणों को और गंभीर बना सकता है।
  • पर्याप्त तरल पदार्थ पिएं।
  • यदि आपको किसी दवा के कारण चक्कर आते है, तो खुराक को रोकने या कम करने के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।
  • यदि चक्कर आने के साथ मतली आती है, तो मेक्लिज़िन या डाइमेनहाइड्रिनेट जैसे ओवर-द-काउंटर एंटीहिस्टामाइन लेने का प्रयास करें। 
  • यदि आप अधिक गर्मी या निर्जलीकरण के कारण चक्कर महसूस कर रहे है, तो किसी ठंडी जगह पर आराम करें और पानी या स्पोर्ट्स ड्रिंक पियें।

सुझाव :

यदि आप लगातार चक्कर आने की समस्या से परेशान है, तो इससे बचाव के लिए आप झावर हॉस्पिटल के अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट से सम्पर्क करें। 

निष्कर्ष :

चक्कर का आना वैसे ज्यादा गंभीर समस्या नहीं है,अगर समय पर इसके उपचार के बारे में सोच ले तो। वही यदि आप इस समस्या से निजात पाना चाहते है तो इससे बचाव के लिए आपको उपरोक्त बातों का ध्यान रखना चाहिए और साथ ही अपने खान-पान में पौष्टिक आहार को शामिल करें।

स्ट्रोक पुनर्वास क्या है और ये कैसे हमारे दिमाग के साथ संबंधित है?
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स्ट्रोक या मस्तिष्क दौरे के क्या है – कारण, लक्षण और बचाव के तरीके !
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जानिए मिर्गी के दौरे को नज़रअंदाज़ करना कैसे हो सकता है खतरनाक ?

मिर्गी एक जानलेवा बीमारी है, क्युकि इसका दौरा पड़ने पर व्यक्ति को खुद की सुध नहीं रहती। वही एक ताजा रिसर्च में यह बात सामने आई है कि मिर्गी के पीड़ितों में मृत्यु का खतरा अन्य लोगों के मुकाबले बहुत अधिक होता है। इसके अलावा इस दौरे के पड़ने पर हमे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इसके बारे में आज के लेख में चर्चा करेंगे ;

मिर्गी का दौरा आने पर क्या करें?

  • मिर्गी की बीमारी गंभीर समस्या है, अगर इसका सही समय पर इलाज न हो तो मरीज के दिमाग पर काफी बुरा असर पड़ता है। वही मिर्गी के लिए कई तरह की थेरेपी और इलाज मौजूद है। 
  • लेकिन ये दौरा अगर घर में अचानक से किसी को पड़ जाए तो ऐसे में आप मरीज को अंगूर का जूस पिला सकते है, इससे थोड़ी राहत मिल सकती है। 
  • इसके अलावा करौंदा खाने से भी मिर्गी का दौरा कम हो सकता है। 
  • साथ ही कद्दू का सेवन करने से भी मिर्गी के दौरे की संभावना को कम किया जा सकता है।  
  • तुलसी के रस से भी मिर्गी के दौरे को कम किया जा सकता है। 
  • दौरे के बाद मरीज़ के आस-पास खुली जगह छोड़े। 
  • दौरे के दौरान मरीज़ को खाने को कुछ न दे।

यदि हॉस्पिटल आपके घर के नजदीक में है और आपके मिर्गी के दौरे का खतरा काफी बढ़ चूका है तो इसके लिए आपको बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना से सलाह लेना चाहिए।

क्या है मिर्गी का दौरा ?

  • मिर्गी एक पुरानी बीमारी है, जिसकी पहचान बार-बार होने वाले अकारण दौरे हैं।
  • वही मिर्गी एक क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जिसमें मस्तिष्क असामान्य रूप से कार्य करता है और बार-बार दौरे का कारण बनता है। तो दौरे मस्तिष्क की समस्याओं के लक्षण हैं जो अचानक हो सकते हैं और मस्तिष्क में असामान्य विद्युत गतिविधि, बेहोशी, और लंबे समय तक शरीर का अनियंत्रित रूप से हिलना इसमें शामिल हो सकता है। 
  • इसके अलावा ये दौरा सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकता है, चाहे उनका लिंग, नस्ल आदि कुछ भी हो। ज्यादातर मामलों में, इसे दवा से ठीक किया जा सकता है। हालांकि, मिर्गी वाले लोगों के दौरे को नियंत्रित करने के लिए कुछ मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

मिर्गी का दौरा पड़ने पर डॉक्टर को कब बुलाना चाहिए ?

  • जब मरीज़ का दौरा पांच मिनट से अधिक समय तक का हो।
  • दौरा रुकने के बाद सांस लेने या होश में आने में अधिक समय लगता हो।
  • पहले दौरे के तुरंत बाद दूसरा दौरा पड़ता हो।
  • आप गर्मी, थकावट, या तेज बुखार का अनुभव कर रहे हो।
  • यदि आप गर्भवती है।
  • आपको मधुमेह की समस्या है।
  • दौरे के दौरान जब आप खुद को चोट पहुँचाते है।
  • दौरा पड़ने से पहले आपके शरीर के एक तरफ अचानक सिरदर्द, सुन्नता या कमजोरी का अनुभव होना स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
  • यदि उपरोक्त तरह की स्थिति आपके दौरे के दौरान उत्पन्न हो जाए तो आपको बिना देरी किए डॉक्टर का चयन कर लेना चाहिए।

सुझाव :

  • अगर आपको भी मिर्गी के दौरे ने काफी परेशान कर रखा है, तो इसके लिए आपको झावर न्यूरो हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

मिर्गी का दौरा काफी खतरनाक माना जाता है ये तो आपने जान ही लिया है, इसलिए आप या आपके परिवार जनों में से कोई इस तरह की समस्या का सामना कर रहा है तो इसके लिए आपको समय पर किसी बेहतरीन डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

स्ट्रोक पुनर्वास क्या है और ये कैसे हमारे दिमाग के साथ संबंधित है?
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  • September 25, 2023

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स्ट्रोक या मस्तिष्क दौरे के क्या है – कारण, लक्षण और बचाव के तरीके !
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  • September 15, 2023

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क्या है न्यूरोसर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट के बीच का मत्वपूर्ण अंतर ?

न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन के बारे में तो अकसर सबने सुना होगा लेकिन इनके बीच के अंतर के बार्रे में बहुत कम लोगों को पता है। इसलिए आज के लेख में हम इन दोनों के बीच अंतर क्या है उसके बारे में बात करेंगे की आखिर इन दोनों का काम क्या होता है और अगर इनसे कोई ट्रीटमेंट करवाना हो तो कौन-से डॉक्टर को किस बीमारी के लिए चुने, तो शुरुआत करते है आर्टिकल की ;

न्यूरोसर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट के बीच क्या अंतर है ?

  • न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन दोनों तंत्रिका प्रणाली विकारों का निदान और प्रबंधन करते है, लेकिन न्यूरोलॉजिस्ट सर्जरी नहीं करते हैं। न्यूरोलॉजिस्ट जटिल न्यूरोलॉजिकल निदान खोजने पर ध्यान केंद्रित करते हैं जिनका इलाज अन्य दवाओं या उपचारों के साथ किया जा सकता है।
  • जबकि एक न्यूरोसर्जन चिकित्सा समस्याओं के इलाज के लिए सर्जरी कर सकता है, न्यूरोलॉजिस्ट दवाओं और अन्य प्रक्रियाओं के साथ विशिष्ट स्थितियों का इलाज भी करते है। 
  • एक न्यूरोलॉजिस्ट और एक न्यूरोसर्जन दोनों ही ईईजी और एमआरआई जैसे जटिल न्यूरोलॉजिकल परीक्षण कर सकते हैं। फिर भी, केवल न्यूरोसर्जन ही स्थिति को ठीक करने के लिए सर्जरी करने के लिए निष्कर्षों का उपयोग कर सकते है, जबकि न्यूरोलॉजिस्ट केवल दवाओं का सुझाव दे सकते है या रोगी को देखभाल के लिए न्यूरोसर्जन के पास भेज सकते है।

तो अगर आपको ये जानना है की बीमारी के समय कौन सी दवाइयां आपको लेनी है तो इसके लिए आपको बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करना चाहिए।

न्यूरोलॉजिस्ट किस चीज में माहिर होते है ?

अगर आपमें निम्न लक्षण नज़र आए तो इसके लिए आपको न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए ;

  • लगातार चक्कर का आना। 
  • भावनाओं में बदलाव का आना। 
  • संतुलन के साथ कठिनाइयाँ। 
  • सिर दर्द की समस्या। 
  • भावनात्मक भ्रम। 
  • मांसपेशियों की थकान आदि। 

न्यूरोलॉजिस्ट दवाइयों की मदद से व्यक्ति का इलाज करते है और ये सर्जरी का चुनाव नहीं करते। 

न्यूरोसर्जन किस चीज में माहिर होते है?

अगर आपमें निम्न गंभीर लक्षण नज़र आए तो सर्जरी करवाने के लिए आपको न्यूरोसर्जन का चयन करना चाहिए ; 

  • इंडोवैस्कुलर रिपेयर करना। 
  • डिस्क हटाना। 
  • क्रानिओटोमी की समस्या। 
  • लम्बर पंक्चर समस्या की सर्जरी। 
  • अनुरिस्म रिपेयर आदि समस्याओं का न्यूरोसर्जन के द्वारा सर्जरी करके ठीक किया जाता है। 

न्यूरोसर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट कौन-सी बीमारी का इलाज करते है ?

  • एक न्यूरोलॉजिस्ट मिर्गी, अल्जाइमर रोग, परिधीय तंत्रिका विकार और एएलएस जैसी न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के इलाज में रुचि रखते हैं।
  • जबकि न्यूरोसर्जन मस्तिष्क की चोटों, ट्यूमर को हटाने और कार्पल टनल सिंड्रोम से निपटने में मदद करता है।

न्यूरोसर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट की चयन के लिए बेहतरीन हॉस्पिटल ?

  • अगर आप अपनी बीमारी के इलाज और सर्जरी के लिए किसी बेहतरीन न्यूरोसर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहते है तो इसके लिए आप झावर ब्रेन एन्ड स्पाइन हॉस्पिटल का चयन कर सकते है।

एक न्यूरोसर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट की शैक्षिक योग्यता क्या है ?

  • एक न्यूरोलॉजिस्ट बनने के लिए चार साल के प्री-मेडिकल स्कूल की आवश्यकता होती है, इसके बाद न्यूरोलॉजी में मेडिकल डिग्री और मूवमेंट, स्ट्रोक आदि में अतिरिक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। 
  • वही न्यूरोसर्जन बनने का शैक्षिक मार्ग अधिक विस्तृत है, जिसके लिए चार साल के प्री-मेडिकल स्कूल और चार साल के मेडिकल स्कूल की आवश्यकता होती है।

निष्कर्ष :

उम्मीद करते है की आपने जान लिया होगा की आखिर क्या अंतर है न्यूरोसर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट के बीच। तो भविष्य में अगर आपको किसी भी तरह की बीमारी होगी तो आपको ये सोचने की जरूरत नहीं होगी की आप कौन से डॉक्टर के पास जाए अपनी परेशानी के लिए।

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  • September 25, 2023

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  • September 15, 2023

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न्युरोलजी: जानें हाथ कांपने की समस्या किस बीमारी की और इशारा करती है !

कुछ लोगों को सामान पकड़ते समय, या कुछ लिखते समय या अन्य काम करते समय हाथ कांपने की दिक्कत होती है।

तो वही कुछ लोगों को पता ही नहीं चलता की ये समस्या क्यों होती है। इसके अलावा आज के लेख में हम बात करेंगे की हाथ कांपने की समस्या क्यों होती है, और हाथ का कांपना किस बीमारी की और इशारा करता है इसलिए इसके बारे में जानने के लिए आर्टिकल के साथ अंत तक बने रहें ; 

क्यों होती है हाथ कांपने की परेशानी ?

  • अगर किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह की दिक्कत हो तो वो ब्रेन की ऐक्टिविटीज से जुड़ी होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब शरीर की कुछ खास कोशिकाएं किसी भी चोट या बीमारी के कारण दब जाती हैं, तब व्यक्ति में इन दिक्कतों की शुरुआत होती है।
  • वही हाथ कांपने की दूसरी समस्या तब उत्पन होती है जब आप चिंतित या क्रोधित हो जाते हैं। 
  • वही अगर आप भी इस समस्या का सामना कर रहें है तो इससे निजात पाने के लिए आपको बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करना चाहिए।

किस बीमारी की वजह से हाथ कांपने की समस्या उत्पन होती है ?

  • ये एक विल्सन डिजीज है। ये बीमारी व्यक्ति को अचानक से नहीं होती है। यह एक दिमाग का रोग है। 
  • वही चोट के अलावा इस बीमारी के कारण वंशानुगत भी हो सकते हैं। जैसे अगर माता-पिता में ये बीमारी होगी तो बच्चों में इस समस्या के उत्पन होने की ज्यादा संभावना होती है।

किन कार्यो को करते वक़्त हाथ कांपने की होती है समस्या ?

  • जिन लोगों को हाथ कांपने की दिक्कत होती है वे कैंची का उपयोग करने, सुईं में धागा डालने, सब्जी काटने, लिखने, देर तक टाइपिंग करने जैसे कुछ कामों को करने में दिक्कत का अनुभव कर सकते हैं, और ऐसे लोगों को हाथों और ब्रेन के बीच अधिक सामंजस्य बनाए रखने की जरूरत होती है।

बिना वजह हाथ कांपने की समस्या क्यों उत्पन होती है ?

  • कुछ अनुभवी डॉक्टरों का कहना है कि बिना वजह हाथ का कांपना तंत्रिका तंत्र में समस्या है और यह समस्या व्यक्ति को बहुत ज्यादा तनाव में भी डाल सकती है। 

हाथ कांपने की समस्या को कैसे सुधारा जा सकता है ?

  • लाइफस्टाइल को व्यवस्थित कर या हाथों से जुड़े व्यायाम करके इस स्थिति को सुधारा जा सकता है। रक्त प्रवाह बाधित न हो, इसका आपको खास ख्याल रखना है।
  • इसके अलावा हाथ सामान्य कार्य करते वक़्त भी कांप रहें है तो इसको नज़रअंदाज़ न करें बल्कि समय रहते डॉक्टर का चयन करें। वही किसी व्यक्ति में यह दिक्कत गंभीर रूप ले चुकी है तो दवाइयों और सर्जरी के जरिए इसका इलाज करें।
  • इसके अलावा इस समस्या के निदान के लिए आप फिजिशियन, न्यूरॉलजिस्ट, सायकाइट्रिस्ट से मिल सकते हैं। जिससे वो आपकी स्थिति के हिसाब से आपकी बीमारी से जुड़ी सलाह और दवाई आपको देंगे।

सुझाव :

अगर हाथ कांपने की समस्या आपके अंदर बीमारी का रूप धारण कर चुकी है तो इससे बचाव के लिए आपको झावर ब्रेन एन्ड स्पाइन हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

हाथ कांपने की समस्या सामान्य सी भी होने पर फ़ौरन डॉक्टर का चयन करें क्युकि इस समस्या का समय रहते इलाज करवा कर हम इस बीमारी का खात्मा जड़ से कर सकते है पर अगर ये समस्या ज्यादा बढ़ गई तो ये अपने साथ कई अन्य बीमारियों को जन्म दे सकती है। इसलिए इसके शुरुआती दौर में ही आप सतर्क हो जाए।

स्ट्रोक पुनर्वास क्या है और ये कैसे हमारे दिमाग के साथ संबंधित है?
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स्ट्रोक पुनर्वास क्या है और ये कैसे हमारे दिमाग के साथ संबंधित है?

स्ट्रोक पुनर्वास एक ऐसा उपचार माना जाता है, जिसमे स्ट्रोक या दिमागी दौरे के कारण हमारा दिमाग सही से कार्य करने में असमर्थ होता है तो उसको फिर से ठीक…

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