दौरे पड़ने पर क्या करे या किन बातों का रखें ध्यान ?

यदि आपको भी दौरे पड़ते है या इस समस्या से आप भी जूझ रहे है तो इससे बचाव के लिए आपको खुद से ही जागरूक होने की जरूरत है। इसके इलावा यदि आपके सामने किसी को दौरे पड़ रहे है तो उसके दौरे के समय को जरूर नोट करे। और उसको इस समस्या से कैसे निजात दिलवाए इस बारे में हम इस लेख में बात करेंगे ;

दौरे पड़ने की समस्या क्यों उत्पन होती है ?

ये समस्या क्यों उत्पन होती है हम इसके बारे में बात करेंगे ;

  • दौरे का पड़ना एक आम बात है। ये स्ट्रोक, सिर की चोट, मेनिनजाइटिस या किसी अन्य बीमारी के कारण भी पड़ सकता है। 
  • जब दिमाग में किसी तरह का इलेक्ट्रिकल डिस्टर्बेंस पैदा होने लगता है तो ये दौरे पड़ते हैं। फिट्स या सीजर्स के दौरान व्यक्ति के व्यवहार, सोचने और समझने की क्षमता प्रभावित होती है। अगर आपको 2 बार से अधिक सीजर्स या दौरे आ चुके हैं तो उसे एपिलेप्सी यानि मिर्गी भी कह सकते हैं। 

दौरे पड़ने पर किन बातों का रखे ध्यान ?

यदि आपके किसी अजीज या करीबी को दौरे पड़ रहे है तो आपको निम्न बातो का ध्यान रखना है ;

  • सबसे पहले तो इस बात का ध्यान रखें कि अगर वह खतरे वाली जगह पर हैं तो उन्‍हें वहां से हटाएँ – जैसे गर्म बर्तन के पास या व्‍यस्‍त सड़क पर। 
  • जमीन पर हैं तो उनके सिर के नीचे तकिया जरूर लगाएं। 
  • गले के आसपास कसे हुए कपड़े को ढीला करें। 
  • उनके ऐंठन खत्‍म होने के बाद उन्‍हें दूसरी करवट लिटाएं। 
  • उनके साथ रहें और पूरी तरह सामान्‍य होने तक आराम से बात करें। 
  • दौरे शुरू होने और खत्‍म होने का समय जरूर दर्ज करें। 
  • प्रभावित व्‍यक्‍ति अगर व्‍हीलचेयर पर है, तो उसके ब्रेक्‍स लगाने के साथ ही सीट बेल्‍ट या सुरक्षात्‍मक उपकरण चालू कर दें। उन्‍हें धीरे से सहारा दें और सिर के नीचे तकिया लगा दें। 
  • उनके मुंह में अपनी उंगली समेत कुछ भी न डालें, पूरी तरह ठीक होने से पहले उन्‍हें कुछ खाने को न दें।
  • इसके इलावा दौरे पड़ने के स्थिति की एक डायरी भी व्यक्ति को जरूर लिखनी चाहिए और उसे अगर बहार कही जा रहे है तो अपने पास ही रखे।

दौरे पड़ने पर और किन बातो का ध्यान रखना चाहिए, इसके बारे में जानने के लिए आप बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना से जरूर से संपर्क करें।

क्या दौरे पड़ने पर एंबुलेंस को बुलाया जा सकता है ?

दौरे पड़ने के दौरान हमे एंबुलेंस की जरूरत कब होती है, के बारे में बात करेंगे ;

  • किसी को पहली बार दौरा पड़ रहा हो तो एंबुलेंस को बुलाए। 
  • दौरे 5 मिनट से अधिक समय तक बने रहने पर। 
  • व्‍यक्‍ति पूरी तरह से चेतना में नहीं आता है, या चेतना में लौटे बिना कई बार दौरे पड़ रहे हों, दौरा पड़ने के दौरान व्‍यक्‍ति बुरी तरह चोटिल हो गया हो तो एंबुलेंस का चुनाव जरूर से करें। 

सुझाव :

यदि आपके दौरे की समस्या काफी जटिल है। तो उपरोक्त बातो को ध्यान में रखते हुए आपको झावर ब्रेन हॉस्पिटल का जरूर से चुनाव करना चाहिए। क्युकि दौरे की समस्या पर समय सर रोक न लगाया जाए तो वो काफी खतरनाक साबित हो सकता है।

निष्कर्ष :

समस्या कोई भी उसका निपटारा तभी हो सकता है, जब उसके बारे में अच्छे से पता हो। लेकिन समस्या के बारे में पता होने पर कोई भी उपचार खुद से न करे बल्कि किसी अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करे।

आखिर क्या होता है पार्किन्सन डिजीज? डॉक्टर से जाने इसके कारण, लक्षण और उपचार के बारे में!
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क्या शरीर में नज़र आने वाले यह लक्षण हो सकते हैं दिमाग की बीमारी का संकेत? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!
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मिर्गी के कारण लक्षण व क्या है इसके इलाज ?

मिर्गी का दौरा पड़ने से व्यक्ति की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है, जिस कारण उसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मिर्गी की समस्या क्यों उत्पन होती है और इसके कारण क्या है, इसके इलावा इस दौरे के पड़ने पर हमे किस डॉक्टर के पास जाना चाहिए हम इसके बारे में आज के आर्टिकल में बात करेंगे ;

मिर्गी के दोर्रे के कारण क्या है ?

  • पहला और महत्वपूर्ण आनुवंशिक कारण है।

  • सिर पर घातक चोट का लगना।

  • ब्रेन ट्यूमर का होना।

  • एड्स की समस्या।

  • जन्म से पहले शिशु के सिर में चोट का लगना।

  • जन्म से मौजूद विकास संबंधित विकार या तंत्रिका संबंधित रोग आदि।

मिर्गी का दौरा क्या है ?

  • मिर्गी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से संबंधित विकार है, जिसकी स्थिति में मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिका की गतिविधि बाधित होती है। नतीजतन, मरीज को दौरे पड़ते हैं, वह बेहोश हो सकता है।

  • अधिकतर मामलों में मिर्गी के कारण पड़ने वाले दौरों से मस्तिष्क पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन कभीकभी दौरों के कारण मस्तिष्क को क्षति जरूर पहुंच सकती है।

मिर्गी का इलाज कौन करता है ?

  • इसके इलावा इलाज से पहले आपको डॉक्टर की डिग्री पर भी खास ध्यान रखना चाहिए।

मिर्गी का दौरा पड़ने के तुरंत बाद क्या करें ?

मिर्गी का दौरा अगर पड़े तो आपको पहले तो ये देखना है कि मरीज़ की स्थिति कैसी है, इसके इलावा निम्न बातो का भी आपको खास ध्यान रखना चाहिए ;

  • इस बीमारी से जूझ रहे लोगों को तनाव बिल्कुल भी नही लेना चाहिए।

  • साथ ही ऐसी जगह पर काम न करें जहां प्रेशर हो, जितना हो सके खुश रहें और अपने दिमाग को आराम दें, क्युकि रिलैक्स होने से मांसपेशियों को भी काफी आराम मिलता है। और अपने रुटीन में मेडिटेशन, योग को जरूर शामिल करें।

मिर्गी के लक्षण क्या है ?

इसके लक्षण कई तरह के हो सकते है, जैसे;

  • अचानक गुस्सा आना।

  • एक ही जगह पर घूमते रहना।

  • मेमोरी का लॉस होना।

  • कुछ समय के लिए कुछ भी याद न रहना।

  • बिना किसी कारण के स्तब्ध रह जाना।

  • अचानक खड़ेखड़े गिर जाना।

  • चेहरे, गर्दन और हाथ की मांसपेशियों में बारबार झटके आना।

मिर्गी में कौनसा उपचार सहायक है ?

मिर्गी में काफी उपचार सहायक माने जाते है, जिनमे से कुछ को हम निम्न में प्रस्तुत कर रहे है ;

  • इसके इलावा एंटीएपिलेप्टिक दवाएं लेने से मिर्गी के दौरे को कम किया जा सकता है।

  • वेगस तंत्रिका उत्तेजना, इसका उपयोग तब किया जाता है, जब मिर्गी का दौरा ज्यादा बढ जाए ।

  • जिन लोगों में मिर्गी के दौरे दवाओं से कंट्रोल नहीं होते, उन्हें डॉक्टर उच्च वसा और कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट वाले आहार लेने का सुझाव देते हैं।

  • मस्तिष्क का जो हिस्सा दौरे के कारण बनता है, उसे अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट मस्तिष्क की सर्जरी के माध्यम से सही कर देते है।

  • मिर्गी का इलाज डॉक्टर शुरुआती तौर पर कुछ मिर्गी की दवाइयां देकर सही करते है।

उपरोक्त उपचार के बारे में तो आपने जान ही लिया है, यदि मिर्गी के दौरे से आप भी परेशान है और इसका उपचार करवाना चाहते हो तो झावर हॉस्पिटल से जरूर संपर्क करे, क्युकि इस हॉस्पिटल में मिर्गी की सर्जरी को अनुभवी डॉक्टरों के द्वारा किया जाता है।

निष्कर्ष :

मिर्गी के दौरे के हल्के लक्षण दिखने पर इसे नज़रअंदाज़ न करे बल्कि इसका इलाज अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट के सम्पर्क में आकर जरूर करवाए।

आखिर क्या होता है पार्किन्सन डिजीज? डॉक्टर से जाने इसके कारण, लक्षण और उपचार के बारे में!
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क्या शरीर में नज़र आने वाले यह लक्षण हो सकते हैं दिमाग की बीमारी का संकेत? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!
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स‍िर के बाएं तरफ हो रहे दर्द के कारण और इलाज

स‍िर के बाएं तरफ हो रहे दर्द के कारण का इलाज न्यूरो डॉक्टर से जाने!

स‍िर के बाई तरफ दर्द क्यों होता हैं ?

सिर में बाई और दर्द के अनेक कारण हो सकते हैं, जिनका वर्णन हम इस लेख में प्रस्तुत करेंगे

  • अगर आपके स‍िर के बाईं ओर दर्द हो रहा है, तो उसे नजरअंदाज न करें। क्युकि इसके पीछे कुछ ठोस कारण हो सकते हैं। माइग्रेन और ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमार‍ियां होने पर भी स‍िर के बाईं ओर दर्द हो सकता है। 
  • इसमें सिरदर्द बाईं साइड समेत सिर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। माइग्रेन से होने वाला सिरदर्द- माइग्रेन के कारण बाईं ओर मध्यम से गंभीर सिरदर्द हो सकता है। 

स‍िर में बाई तरफ दर्द के क्या कारण हैं ?

सिर में बाई तरफ दर्द के अनेक कारण मानें जाते हैं, जिनका वर्णन हम निम्न में प्रस्तुत कर रहें हैं ;

  • माइग्रेन, की समस्या होने पर आपको सिर के बाई तरफ दर्द का आभास होता हैं।  तो वही दर्द के साथ जी म‍िचलाना, उल्‍टी, चक्‍कर के संकेत भी आपमें नज़र आ सकते हैं। 
  • नींद में कमी की वजह से भी आपके सिर के बाई और तेज दर्द हो सकता हैं। 
  • यदि आपके सिर की कोई सर्जरी हुई हो तो भी आपके सिर के बाई और दर्द हो सकता हैं। 
  • आंख के अंदर दबाव पड़ने पर ग्‍लूकोमा नाम की बीमारी भी दर्द का कारण हैं। 
  • ब्रेन ट्यूमर को भी सिर के बाई और दर्द का कारण माना जाता हैं। 

यदि सिर के बाई और दर्द का कारण बढ़ता जा रहा हैं तो इसे बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ न करते हुए बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करें। 

सिर के बाई और दर्द होने का इलाज क्या हैं ?

सिर में दर्द होने के इलाज को डॉक्टर मरीज़ के दर्द के हिसाब से करते हैं, जैसे

  • दर्द दूर करने के ल‍िए डॉक्‍टर की सलाह पर पेनक‍िलर का सेवन आप कर सकते हैं।
  • स‍िर के एक तरह दर्द होने पर डॉक्‍टर आपको व‍िटाम‍िन्‍स या सप्‍लीमेंट्स लेने की सलाह जरूर देंगे।
  • बाई और दर्द होने पर स‍िर, गर्दन में गरम या ठंडे पानी से सिंकाई जरूर करें।
  • शुगर लेवल लो है, तो कुछ खा लें। क्युकि कुछ न खाने की वजह से भी सिर में तेज दर्द हो सकता हैं।   
  • नीलग‍िरी तेल से माल‍िश करके भी आप दर्द से राहत पा सकते है।

लेकिन इन सब के सेवन को खुद पर आजमाने से पहले आप डॉक्टर से जरूर एक बार सलाह ले। 

सिर के बाई और दर्द क्यों होता हैं इसके कारणों को तो आपने जान ही लिया है, लेकिन इसको जानने के बाद भी आप सतर्क नहीं होते तो इसका खामियाजा आपको काफी खतरनाक देखने को मिलता हैं। 

तो वही यदि आप इस बीमारी का खात्मा जड़ से करना चाहते हैं तो इसके लिए आप झावर न्यूरोलॉजिस्ट हॉस्पिटल का चुनाव भी कर सकते हैं। क्युकि यहाँ पर डॉ सुखदीप सिंह झावर के द्वारा मरीज़ से अच्छे से बात करके उसकी बीमारी को जानने के बाद इनके द्वारा मरीज़ का इलाज किया जाता हैं। तो वहीं इलाज के दौरान इस हॉस्पिटल में आधुनिक उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जाता हैं। 

निष्कर्ष :

यदि आपको भी सिर में बाई और दर्द का आभास हो रहा हैं तो कृपया इसे नज़रअंदाज़ न करें, बल्कि समय रहते किसी अच्छे डॉक्टर का चुनाव अपनी परेशानी को हल करने के लिए करें। क्युकि आप सभी जानते हैं कि समय पर किया गया कोई भी कार्य आपको हमेशा लाभ ही पहुंचाता हैं।

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सिर,पीठ और गर्दन में दर्द की समस्या ने न्यूरो संबंधी बीमारियों को दिया आमंत्रण

 न्यूरोलॉजिस्ट कौन होता हैं ?

० एक न्यूरोलॉजिस्ट मस्तिष्क और तंत्रिका प्रणाली के रोगों के निदान और उपचार में विशेषज्ञ होता है।

० तो वही ये न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर, और अन्य केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से संबंधित स्थितियों जैसी

बीमारियों का भी इलाज करते हैं।

० तंत्रिका विकार या न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर आमतौर पर नर्वस सिस्टम को प्रभावित करने वाले वायरल, जीवाणु,

कवक और परजीवी संक्रमण के कारण होते हैं।

० नर्वस सिस्टम की बात करें तो इसमें अल्जाइमर रोग, डिमेंशिया, मिर्गी, सेरेब्रोवास्कुलर जैसे माइग्रेन, स्ट्रोक और अन्य

    सिरदर्द शामिल होते हैं।

० न्यूरोलॉजिकल समस्या आमतौर पर किसी वायरल या संक्रमण के कारण होते हैं. इससे हमारे शरीर के कई अंगों को

एक साथ नुकसान पहुंच सकता है।

न्यूरोलॉज़ी के आम लक्षण क्या पाए जाते हैं ?

> सिर, गर्दन, पीठ या शरीर के विभिन्न अंगों में दर्द।

> अंगों का फड़कना, झुनझुनी या कमजोरी का होना।

> कमजोरी, आंखों की रोशनी का कम होना, चक्कर आना और बोलने या निगलने में परेशानी।

> दौरे पड़ना, अंगों का मरोड़ना और बार-बार बेहोश होना।

> मांसपेशियों में अकड़न, कपकपी, याददाश्त या मानसिक क्षमता का कमजोर होना।

भोजन करते समय इन बातों का रखें खास ध्यान!

एक न्यूरोलॉज़ी के मरीज़ को अपने स्वास्थय शरीर के लिए खाने की तरफ खास ध्यान रखना चाहिए, जिनका उल्लेख निम्न हैं

  • हरी-पत्तेदार सब्जियों का सेवन, जोकि विटामिन से भरपूर होने की वजह से हमारे शरीर को पोषण देती हैं।
  • मछली का तेल भी काफी फायदेमंद माना जाता है हमारे सेहत के लिए।
  • डार्क चॉकलेट का इस्तेमाल।
  • ब्रॉक्ली।
  • सामन मछली।
  • अवाकाडो।
  • बादाम।
  • कद्दू के बीज इत्यादि।

न्यूरो संबंधी बीमारियां:

  • सिर दर्द होना।
  • मिर्गी और दौरे का पड़ना।
  • सहलाना या इसे ब्रेन अटैक भी कह सकते हैं |
  • अल्जाइमर रोग और मनोभ्रंश की वजह से मस्तिष्क का सिकुड़ना इत्यादि।

इन रोगो को देखते हुए आप बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन अपने रोगो और लक्षणों के हिसाब से कर सकते हैं

न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर या न्यूरोलोजी की बीमारी का इलाज क्या हैं?

  1. प्रभावी उपचार के लिए एक अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें. न्यूरोलॉजिकल स्थिति को जानने के लिए

न्यूरोलॉजिस्ट को कई तरह के परीक्षण करने की जरूरत भी पड़ सकती हैं, आपके रोग जानने के बाद।

  1. कुछ मामलों में, उन्हें गंभीर परिस्थितियों में ऑपरेशन करने के लिए न्यूरोसर्जन या इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट की मदद

की जरूरत हो सकती है. एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस रोग में किसी को भी बिना घबराए बहुत ही संयम के

साथ चलना चाहिए और जरूरी भावनात्मक समर्थन और देखभाल की व्यवस्था जरूर से करनी चाहिए

  1. क्युकि अच्छे देखभाल की वजह से रोगी जल्दी ठीक हो जाता हैं।

यदि आप भी मस्तिष्क के रोग से निजात पाना चाहते हैं, तो झवार न्यूरोलॉजी हॉस्पिटल का चयन आपके और आपके सेहत के लिए काफी सही रहेगा और साथ ही मष्तिष्क से जुडी जो भी स्कैन होते है | उसकी सुविधा भी इस हॉस्पिटल में मौजूद हैं। जिससे की लोगो को किसी भी तरह की परेशानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा |

 निष्कर्ष :

लक्षण के हिसाब से यदि आपको मष्तिष्क से जुडी कोई भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो आप अपने डॉक्टर से सलाह लेकर किसे अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट के सम्पर्क में आए ताकि आपकी बीमारी का रोकथाम वही पर कर दिया जाए। जिससे की आपको ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

आखिर क्या होता है पार्किन्सन डिजीज? डॉक्टर से जाने इसके कारण, लक्षण और उपचार के बारे में!
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