क्या वाकई अपने आप आदतों का बदलना भी हो सकता है पार्किंसंस बीमारी का शुरूआती लक्षण? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

आम तौर पर, दिमाग हमारे शरीर में काफी महत्वपूर्ण स्थान को रखता है, जिसके कारण ही हमारा शरीर किसी गतिविधि को कर पाता है। इसके बिना हमारे शरीर का कोई भी हिस्सा अच्छे तरीके से काम नहीं कर सकता है। इसलिए, इसका स्वस्थ होना और किसी भी तरह की बीमारी से दूर रहना सम्पूर्ण स्वास्थ्य बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दिमाग हमारे शरीर की गतिविधियों को कंट्रोल में रखने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करता है। आज के समय में, लोगों को दिमाग से जुड़ी कई तरह की समस्याएं काफी ज्यादा परेशान कर रही हैं। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में कई इस तरह के रोग होते हैं, जो शुरुआत में बिना किसी लक्षण के विकसित हो जाते हैं। इसी के चलते बहुत से लोग इन की पहचान नहीं कर पाते हैं और जब दिमाग से जुड़ी समस्या हद से ज्यादा बढ़ जाती है, तो उस वक्त उनको समस्या के बारे में पता चलता है। दरअसल, इन्हीं समस्याओं में से एक है पार्किंसंस डिजीज। 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि पार्किंसंस बीमारी एक इस तरह की न्यूरोडीजेनरेटिव दिमाग की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को इसके शुरुआती लक्षणों के बारे में पता नहीं चल पाता है, पर समस्या के शुरुआती लक्षण मरीज की आदतों में छोटे-छोटे बदलावों के रूप में विकसित होने लग जाते हैं। आम तौर पर, मरीज खुद और परिवार में उसका ध्यान रखने वाले सदस्य इन लक्षणों या फिर आदतों में होने वाले इन बदलावों की पहचान नहीं कर पाता है। इन बदलावों में शामिल हैं, जैसे मरीज की आवाज धीमी पड़ जाना, लिखावट में बेहद मामूली बदलाव आना और चलने की गति में हल्की सी कमी आना जैसे और भी कई बदलाव शामिल हो सकते हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि हम में ज्यादातर लोग इन लक्षणों को आम समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं, क्योंकि बुढ़ापे जैसी स्थिति में इसको केवल व्यक्ति की थकान और कमजोरी समझ लिया जाता है। पर, इस तरह की स्थिति में आपको और भी ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है, क्योंकि कई बार इन आदतों में होने वाले बदलाव पार्किंसंस जैसी समस्या के शुरुआती लक्षण भी हो सकते हैं, जिन पर नजर रखना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, व्यक्ति की आदतों में होने वाले इन बदलावों के माध्यम से ही शरीर पहले से चेतावनी दे देता है। ऐसे में, डॉक्टर का कहना है, कि हाँ अपने आप आदतों में होने वाले बदलाव भी पार्किंसंस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में से एक माने जाते हैं। इस समस्या में अपनी सेहत का ध्यान रखना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। अगर समस्या के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर ली जाये, तो समस्या को कंट्रोल में करना काफी ज्यादा आसान हो जाता है। इसी के उलट अगर इस समस्या में नजर आने लक्षणों को आम समझ कर नजरअंदाज कर दिया जाये, तो यह बीमारी को और भी ज्यादा गंभीर बना सकता है। जिसके कारण सेहत को भारी नुक्सान का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, अगर आपको अपने शरीर में, किसी भी तरह के बदलाव नजर आए, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से मिलने की जरूरत होती है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं .

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क्या पार्किंसन रोग केवल हाथों-पैरों की कंपन से जुड़ा होता है? 

दरअसल, डॉक्टर का इस पर पहना है, कि अक्सर लोग पार्किंसन जैसी बीमारी को केवल हाथों और पैरों में होने वाली कंपन से जोड़ कर देखते हैं, पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। आम तौर पर, इस समस्या के कई अन्य लक्षण भी होते हैं, जो समस्या के दौरान आसानी नजर नहीं आते हैं और वह लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं: जैसे कि 

  1. चलने और फिरने की गति में धीमापन आना 
  2. चलते वक्त खुद को असामान्य महसूस होना
  3. कोई भी कपड़ा पहनते वक्त काफी दिक्क्त महसूस होना। 
  4. कोई भी शारीरिक गति करते वक्त दिक्कत महसूस होना। 
  5. शरीर के ऊपरी हिस्से में जकड़न की समस्या का अनुभव होना 

इसके अलावा, चलते समय हाथों या फिर शरीर के ऊपरी हिस्से में जकड़न की समस्या होने पर हिलने और डुलने की गति का धीमा हो जाना, जिसके कारण व्यक्ति को चलने में काफी दिक्कत महसूस हो सकती है। 

पार्किंसन डिजीज के अन्य लक्षण क्या हो सकते हैं? 

आम तौर पर, अब बात करते हैं, उन लक्षणों के बारे में जो शरीर के मूवमेंट से जुड़े नहीं होते हैं, पर यह उतने ही ज्यादा महत्वपूर्ण भी होते हैं और अक्सर ऐसे में मूवमेंट की समस्या शुरू होने से पहले ही नजर आने लग जाते हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि समस्या में यह लक्षण बहुत ही ज्यादा आम होते हैं, जिसकी वजह से ही लोग या फिर पीड़ित व्यक्ति इन को पार्किंसन जैसी बीमारी से जोड़ कर नहीं देख पाता है और साथ में इन पर महत्वपूर्ण ध्यान न देकर इन को नजरअंदाज कर देता है। समस्या के दौरान नजर आने वाले यह लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. नींद न आने की समस्या होना।
  2. किसी भी चीज को सूंघने की शक्ति कम हो जाना। 
  3. हमेशा ही शरीर में थकान बनी रहना। 
  4. घबराहट महसूस होना। 
  5. बार- बार कब्ज की समस्या होना। 
  6. डिप्रेशन की समस्या होना और इसके अलावा अन्य मानसिक समस्याओं का होना। 
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निष्कर्ष: तंत्रिका तंत्र और दिमाग से जुड़ी कई इस तरह की बीमारी होती हैं, जिनके शुरुआती लक्षणों की पहचान करने में पीड़ित व्यक्ति को अक्सर ही गलती हो जाती है, क्योंकि कई समस्याओं के लक्षण इतने ज्यादा आम होते हैं, कि लोग कई बार उन को अपनी थकान समझ कर या फिर बुढ़ापे की कमजोरी समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं। इसी में से एक है पार्किंसंस की बीमारी। पार्किंसंस बीमारी एक आम समस्या है, जो व्यक्ति के दिमाग से जुड़ी होती है। यह कई लोगों को बिना किसी लक्षण के प्रभावित कर सकती है, पर गंभीर होने पर इसके लक्षण नजर आने लग जाते हैं, जिन पर महत्वपूर्ण ध्यान देकर तुरंत इलाज करवाना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। ताकि समस्या को और भी ज्यादा गंभीर होने से रोका जा सके। कुल मिलाकर पार्किंसन बीमारी की शुरुआत अचानक से नहीं होती है, बल्कि इस समस्या की शुरुआत धीरे-धीरे होती है, जिसके कारण इसको चुपचाप होने वाली बीमारी भी कहा जाता है। इस समस्या के दौरान शरीर में होने वाले छोटे छोटे पर महत्वपूर्ण बदलावों पर ध्यान देकर समस्या को समय पर कंट्रोल किया जा सकता है। इसके साथ ही समस्या की समय पर पहचान करके बेहतर इलाज किया जा सकता है। अगर आप इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं, तो इससे समस्या का इलाज देर हो सकता है, जो सेहत के लिए ठीक साबित नहीं हो सकता है। अपने आप आदतों में होने वाले बदलाव भी पार्किंसंस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में से एक माने जाते हैं। इसलिए, सतर्क रहना महत्वपूर्ण होता है। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए आप आज ही झावर न्यूरो हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. दिमाग को तनाव से किस तरह दूर किया जा सकता है? 

आम तौर पर, अगर आप अपने दिमाग को तनाव से दूर रखना चाहते हैं, तो इसके लिए आप सबसे पहले गहरी सांस लेने के अभ्यास करें, रोजाना व्यायाम करें, संतुलित आहार का सेवन करें, रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लेने जैसे कई तरीकों को अपना सकते हैं। यह तरीके से तनाव को दूर करने में काफी असरदार साबित होते हैं। इसके अलावा, आप मानसिक शांति के लिए किसी अच्छे डॉक्टर से भी सलाह ले सकते हैं। 

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प्रश्न 2. किन कारणों की वजह से दिमाग पर गंभीर रूप से प्रभाव पड़ता है? 

दरअसल, आपकी जानकरी के लिए आपको बता दें, कि कई कारणों की वजह से दिमागी सेहत गभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। पर, लगातार तनाव रहना, खराब पोषण का मिलना, फिजिकल इनएक्टिविटी होना और ट्रॉमा जैसे कई मुख्य कारणों की वजह से दिमाग पर सबसे ज्यादा गंभीर और गहरा प्रभाव पड़ सकता है। 

प्रश्न 3. ज्यादा तनाव के कारण दिमाग की हालत अंदर से कैसी हो जाती है? 

आम तौर पर, अगर कोई व्यक्ति काफी लंबे समय से और अत्यधिक तनाव से घिरा हुआ होता है, तो ऐसे में दिमाग के अंदर की स्थिति काफी ज्यादा बिगड़ जाती है। इसके कारण न केवल दिमाग के न्यूरॉन्स के बीच के संपर्क में रुकावट आने लगती है, बल्कि इसके कारण हिप्पोकैम्पस का आकार भी काफी हद तक सिकुड़ने लग जाता है। इसके साथ ही अंदरूनी तौर पर हार्मोन का संतुलन काफी ज्यादा बिगड़ने लग जाता है, जिसके कारण व्यक्ति का दिमाग अक्सर लड़ो या फिर भागो की हाई-अलर्ट स्थिति में ही फंस कर रह जाता है। 

प्रश्न 4. पार्किंसंस बीमारी के क्या-क्या लक्षण हो सकते हैं?

आम तौर पर, पार्किंसंस दिमाग से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, विशेष तौर पर जिस में चलने-फिरने, संतुलन बनाने और मांसपेशियों को कंट्रोल में रखने में रखने की शक्ति बुरी तरीके से प्रभावित हो जाती है। दरअसल, इस बीमारी के लक्षणों में, व्यक्ति के हाथ और पैरों में कपकपी छूटना, शरीर में अकड़न महसूस होना, चलने-फिरने की गती धीमी हो जाना और संतुलन का बिगड़ जाना जैसे कई लक्षण सामने आ सकते हैं। 

प्रश्न 5. पार्किंसंस से कौन सी आदत सबसे ज्यादा प्रभावित होती है? 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि पार्किंसंस जैसी बीमारी में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली आदतें दैनिक गतिविधियां होती हैं, जिनमें धीमी गति होना और मांसपेशियों में जकड़न होना शामिल होता है।

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