क्यों हकलाता है आपका बच्चा? जानें इसके लक्षण और इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है?

हकलाने की समस्या जोकि हम छोटे बच्चों में अकसर देखते है पर जरा सोचे अगर आपका बच्चा बड़ा जो जाए उसके बाद भी इस तरह की समस्या का सामना कर रहा हो तो कैसे हम ऐसे में बच्चे का बचाव कर सकते है। वही छोटे बच्चों में हकलाने के क्या है कारण, प्रकार और कैसे लक्षणों की मदद से हम इस तरह के बच्चों को ठीक कर सकते है इसके बारे में आज के आर्टिकल में बात करेंगे ;

क्या है हकलाने की समस्या ?

  • हकलाना जिसे अंग्रेजी में स्टैमरिंग या स्टटरिंग कहा जाता है, जो एक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है। वही इस कंडीशन में व्यक्ति सामान्य रूप से बोल पाने की क्षमता को खो देता है। इसमें आमतौर पर व्यक्ति सामान्य रूप से बोलने की जगह बोलते समय किसी शब्द या अक्षर को बार-बार बोलने लगता है या फिर शब्द की ध्वनि को लंबा बना देते है। 
  • हकलाने से जुड़ी समस्याएं आमतौर पर 4 से 7 साल के बच्चों में देखी जाती है। ऐसा आमतौर पर इसलिए होता है, क्योंकि इस उम्र में बच्चे शब्दों को जोड़कर और उनका वाक्य बनाकर बोलना सीखने लगते है।
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यदि आप या आपके बच्चे में हकलाने की समस्या उत्पन्न हो गई है तो इससे बचाव के लिए आपको बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करना चाहिए।

हकलाने की समस्या के कारण क्या है ?

  • सबसे पहले तो इसके कारण में फैमिली हिस्ट्री शामिल है। 
  • फिर न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर का आना।  
  • स्पीच सुनने या लैंग्वेज को समझने में दिक्कत का आना भी इसके एक कारण में शामिल है।

हकलाने के लक्षण क्या है ?

  • हकलाने के लक्षणों में सबसे पहले तो व्यक्ति किसी भी बात को शुरू करने से पहले डरता है और बात करते वक़्त वो हिचकिचाहत महसूस करता है। 
  • रुक-रुक कर बोलना, एक ही शब्द को बार-बार बोलना, तेज बोलना, बोलते हुए आंखें भींचना, होठों में कंपकपाहट होना, जबड़े का हिलना आदि। उच्चारण की समस्या होना और साफ न बोल पाना।
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हकलाने के प्रकार क्या है ?

  • डेवलपमेंटल स्टैमरिंग, यह हकलाने का सबसे आम प्रकार है, जो आमतौर पर बचपन के शुरुआती दौर में देखा जाता है।
  • एक्वायर्ड स्टैमरिंग, इसे लेट स्टैमरिंग कहा जाता है, इसके अन्य कुछ प्रकार भी हैं जैसे –
  • न्यूरोजेनिक स्टैमरिंग, यह आमतौर पर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में किसी प्रकार की क्षति होने के कारण होता है।
  • साइकोजेनिक स्टैमरिंग, यह हकलाने की समस्या का एक असामान्य प्रकार है, जिसका मतलब है कि इसके मामले कम देखे जाते है।

हकलाने का इलाज क्या है ?

  • हकलाने की समस्या का इलाज अनुभवी डॉक्टर स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट के द्वारा करते है, जिसमें वे मरीज के हकलाने की समस्या में सुधार करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते है। 
  • वही व्यक्ति को अगर किसी प्रकार की भावनात्मक समस्या के कारण हकलाने की समस्या हो रही है, तो अन्य साइकोलॉजिकल थेरेपी की मदद से स्थिति का इलाज किया जाता है। हालांकि, हकलाने की समस्या का इलाज आमतौर पर मरीज की उम्र, लक्षणों और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। 
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सुझाव :

अगर आपका बच्चा कुछ ज्यादा ही हकला रहा है तो इससे बचाव के लिए आपको जल्द ही डॉक्टर के संपर्क में आना चाहिए और इसके इलाज के लिए आपको झावर हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

हकलाने की समस्या काफी गंभीर मानी जाती है, वही बाल्यावस्था में इस तरह की समस्या अगर बच्चों को हो जाए तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ता लेकिन ये समस्या अगर युवावस्था में हो जाए तो व्यक्ति को कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है जिस वजह से कई दफा वो डिप्रेशन में भी चला जाता है। वही इस तरह की समस्या का खात्मा जड़ से तो नहीं किया जा सकता लेकिन हां समय पर पता चलने पर इलाज के दौरान व्यक्ति को फ़ायदा दिलवाया जा सकता है।

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