डाउन सिंड्रोम क्या होता है, इसके मुख्य लक्षण, कारण और कैसे करें उपचार ?

डाउन सिंड्रोम अनुवांशिक से जुड़ा एक विकार है, जिससे पीड़ित व्यक्ति के पास एक अतिरिक्त गुणसूत्र का टुकड़ा होता है, जो विभिन्न शरीरिक और संज्ञात्मक से जुड़े समस्यों को उत्पन्न करने का कार्य करते है | जिसकी वजह से शरीरिक और मानसिक विकास में देरी, बौद्धिक से जुडी अक्षमताएं, चेहरे की विशिष्ट विशेषताएं जैसे की तिरछी आंखों का होना, एक सपाट नाक, हृदय से जुड़े कुछ दोष और थाइरोइड की समस्या आदि शमिल होते है | डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्तियों को कई तरह की समस्यों से गुजरना पड़ जाता है, कई लोग ऐसे भी होते है जो उचित समर्थन और संसधानों के साथ ही अपना पूरी ज़िन्दगी बिताते है | प्रारंभिक हस्तक्षेप कार्यक्रम और अवशोषण शिक्षा उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकते है और उन्हें समाज के प्रति सकारात्मक योगदान में सक्षम बना सकती है | यदि आप में कोई भी व्यक्ति ऐसे ही किसी स्थिति से गुजर रहा है तो इलाज के लिए आप न्यूरोमास्टर झावर हॉस्पिटल से परामर्श कर सकते है | आइये जानते है डाउन सिंड्रोम कितने प्रकार के होते है :-   

डाउन सिंड्रोम कितने प्रकार के होते है ? 

डाउन सिंड्रोम मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते है, जिनमें शामिल है :- 

 

ट्राइसोमी 21 

यह डाउन सिंड्रोम होने का सबसे आम प्रकार है, जिसके लगभग मामले 95 प्रतिशत होते है | यह सिंड्रोम होने वाले व्यक्तियों  में क्रोमोसोम 21 की अतिरिक्त टुकड़े के कारण उत्पन्न होता है | जिसकी वजह से शरीर में मौजूद प्रत्येक कोशिका में सामान्य दो के बजाए, कुल तीन टुकड़े बनने लग जाते है | आमतौर पर ट्राइसोमी 21 माता-पिता के प्रजनन कोशिकाओं के निमार्ण के दौरान उत्पन्न  होता है | जिसके परिणामस्वरूप निषेचित अंडे में अतिरिक्त गुणसूत्र 21 बनने लग जाते है | 

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ट्रांसलोकेशन डाउन सिंड्रोम

इस डाउन सिंड्रोम के मामले कम से कम 3 प्रतिशत तक ही सामने आते है | यह डाउन सिंड्रोम एक व्यक्ति को तब होता है, जब कोशिका विभाजन के दौरान क्रोमोसोम 21 का एक हिस्सा टूट जाता है और क्रोमोसोम का दूसरा हिस्सा, क्रोमोसोम 14 के साथ जाकर जुड़ जाता है | हालांकि शरीर में क्रोमोसोम की संख्या 46 तक होती है और यह अतिरिक्त अनुवांशिक मटेरियल डाउन सिंड्रोम की विशिष्ट विशेषताओं का कारण उत्पन्न होते है | 

 

मोज़ेक डाउन सिंड्रोम 

इस डाउन सिंड्रोम को सबसे अधिक दुर्लभ रूप माना जाता है, जिसके लगभग मामले 2 प्रतिशत तक होते है | मोज़ेक डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्तियों के शरीर में कोशिकाओं का मिश्रण हो जाता है, तो कुछ में क्रोमोसोम 21 के विशिष्ट 2 टुकड़ों या फिर अन्य तीन में विभाजित हो जाते है | इस तरह के मोज़ेक पैटर्न की उपस्थिति में निषेचन के बाद कोशिका विभाजन में हुए चूक के परिणामस्वरूप उत्पन्न होता है | जिसकी वजह से डाउन सिंड्रोम से जुडी शरीरिक और मानसिक विशेषतओं की डिग्री अलग-अलग होती है | 

 

डाउन सिंड्रोम होने के मुख्य लक्षण क्या है ?    

डाउन सिंड्रोम शारीरिक, विकासात्मक और समझने के लक्षणों का एक शृंखला को प्रस्तुत करता है | डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्ति में अपनी क्षमताओं और विशेषताओं में व्यापक रूप से भिन्न होते है, तो कुछ सामान्य लक्षण भी हो सकते है, जिनमें शामिल है :- 

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  • डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्ति में शारीरिक विकास सामान्य रूप से काफी धीमा हो जाता है | 
  • उनके सिर का आकार सामान्य से छोटा और असामान्य आकार का हो सकता है | 
  • चेहरे का आकार थोड़ा चपटा होता है और नाक भी चपटी होती है | 
  • आंख के अंदरूनी कोने गोल आकार के होते है और ऊपर की ओर पलके झुकी हुई होती है | 
  • जीभ भी इनके मुंह से बाहर की तरफ निकली रहती है | 
  • इनके हाथों के आकार छोटे और चौड़े होते है और हथेली में एक ही तेह मौजूद होती है | 
  • उनकी मांसपेशियां काफी कमज़ोर होती हैम, जिसके परिणामस्वरूप जोड़ भी काफी ढीले होते है | 
  • आंखों के रंगीन भाग में छोटे-छोटे सफ़ेद धब्बे मौजूद होते है आदि | 

 

डाउन सिंड्रोम होने के मुख्य कारण क्या है ?            

डाउन सिंड्रोम विशेष रूप से अनुवांशिक विसंगतियों से उत्पन्न होता है, जिसका सबसे आम कारण ट्राइसोमी 21 है, जिससे पीड़ितों के मामले लगभग 95 प्रतिशत तक होते है | आसान भाषा में बात करें यह कोशिका विभाजन के दौरान होने वाली एक अवशिष्ट त्रुटि होती है, जिससे नोडिसफंक्शन भी कहा जाता है | इस त्रुटि की वजह से अंडे या फिर शुक्राणु में गुणसूत्र 21 की एक अतिरिक्त प्रतिलिपि होती है, जिसे अतिरिक्त गुणसूत्र को ट्राइसोमी 21 भी कहा जाता है | यह अतिरिक्त गुणसूत्र शरीर और मस्तिष्क के विकास में समस्या को पैदा कर सकती है | 

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डाउन सिंड्रोम का कैसे करें इलाज ? 

हालांकि डाउन सिंड्रोम का विशेष रूप से कोई इलाज नहीं है, लेकिन इस स्थिति वाले व्यक्तियों को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को पूर्ण करने के उद्देश्य से कई तरह के उपचार और हस्तक्षेपों से लाभ हो सकता है | इसके शुरुआती हस्तक्षेप कार्यक्रम में विकास का समर्थन करने और शारीरिक रूप से कौशल को बढ़ाने के लिए व्यावसायिक और भाषण चिकित्साएं को प्रदान किया जाता है | जैसे-जैसे डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्ति वयस्कता की ओर बढ़ते है, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोज़गार सहायता उन्हें स्वतंत्रता प्राप्त करने और समाज से सार्थक योगदान देने में सक्षम बनाती है | 

 

यदि आप में से कोई भी व्यक्ति ऐसे किसी परिस्थिति से गुजर रहा है इलाज के लिए आप न्यूरोमास्टर झावर हॉस्पिटल से परामर्श कर सकते है | हालांकि इस समस्या का पूर्ण रूप से इलाज नहीं किया जा सकता है, लेकिन यह संस्था आपको प्रारंभिक हस्तक्षेप कार्यक्रम और अवशोषण शिक्षा प्रदान करने में मदद कर सकती है | इस संस्था के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर सुखदीप सिंह झावर पंजाब के न्यूरोसर्जन में से एक है, जो पिछले 15 सालों से  डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्तिओं की परेशानियों को कम करने में पूर्ण रूप से मदद कर रहे है | इसलिए परामर्श के लिए आज ही न्यूरोमास्टर झावर हॉस्पिटल की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं और अपनी अप्पोइन्मेंट को बुक करें | इसके अलावा आप चाहे तो वेबसाइट पर दिए गए नंबरों से संपर्क कर सीधा संस्था से बातचीत कर सकते है |                 

 

     

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